अधूरा प्रेमकाव्य

kumari archana
उससे मोहब्ब़त की चाहत में
जब भी दिल लगाया,
कविता को लिखा
जब भी दिल टूटा
कविता  को लिखा।
कुछ पन्ने खो गए,
कुछ पन्ने रद्दी की टोकरी में
चले गए
कुछ को मैंने जला दिया,
कुछ खुद-ब-खुद गायब़ हो गए।
बार-बार कलम पकड़ी,
बार-बार कलम छोड़ी
इसे पकड़ने और छोड़ने के
क्रमवत सिलसिले चलते रहे।
धीरे-धीरे मेरे अंदर की
कवियित्री का विकास होता रहा,
और निरन्तर ही हो रहा है।
या यूँ कहें कि मोहब्ब़त को पाने,
और न मिल पाने की चाहत ने
हमें कवियित्री बना दिया।
जब लक्ष्यवहीन
दिशावहीन थी,
मुझे जीवन जीने का एक उद्देश्य
तुम्हारी यादों ने मुझे
 ‘कविता’ बन दिया।
इसलिए मेरी कविता
‘अधूरा प्रेमकाव्य’ है॥
                                                                                     #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला हरिश्चन्द्रपुर(पूर्णियाँ) की निवासी हैं।

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