जलती रही जौहर में नारियां,
भेड़िए फ़िर भी मौन थे।
हमें पढ़ाया गया अकबर महान,
तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे?
हुआ तांडव मुगलों का जब,
सारा जनमानस मौन था।
हुए बहुत मराठे वीर पर,
शिवाजी सबमें शेर थे।
सड़ती रही लाशें सड़कों पर,
गांधी फिर भी मौन थे,
हमें पढ़ाया गांधी के चरखे से
आजादी आई,
तो फांसी चढ़ने वाले २५-२५
साल के वो जवान कौन थे??
#प्रमोद बाफना
परिचय :प्रमोद कुमार बाफना दुधालिया(झालावाड़ ,राजस्थान) में रहते हैं।आपकी रुचि कविता लेखन में है। वर्तमान में श्री महावीर जैन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय(बड़ौद) में हिन्दी अध्यापन का कार्य करते हैं। हाल ही में आपने कविता लेखन प्रारंभ किया है।
Sat Jul 8 , 2017
बाँधकर दिल को हमारे, मुक्त ऐसे कर दिया। भूल बैठे फर्क भी हम मुक्त हैं कि कैद हैं। हम कहें तो क्या कहें, जो-जो उन्होंने कह दिया। दर्द भी दिल के हमारे, सर्द हैं खामोश हैं। फासला सोचों का है, छाया है,दिल के दरमियां। कौन सच्चा,कौन झूठा, सरपरस्त यह वक्त […]
Very nice and motivational poetry by pramod ji