भूली दास्ताँ

rashmi thakur
दिल परेशां है आँख आज हुई नम,
भूली कोई दास्ताँ याद आ  ही गई।
चैन मेरा  कहीं आज खो सा गया,
बीती बातों से बेचैन ये दिल हुआ।
सुकूँ  के दो पल अब दिल  चाहता,
कोई मिलता है नहीं अपनी तरह।
बीच बाजार में अब लगे तन्हाई-सी,
कैसी ये ख़ामोशी दिल में है छाई सी
मन ये तड़पे हमारा कुछ इस तरह,
मीन जैसे तड़पती है बिन नीर के।
न किसी से प्यार है न शिक़वा मेरा।
फिर मन क्यों मेरा आज है बावरा।
रास आया न हमको सारा संसार ही,
हुई क्या खता जो ये जीवन मिला।
दर्दे दिल मेरा अब  सुनाऊँ तो किसे,
कभी समय तो कभी साथी न मिला॥

                                                          #रश्मि ठाकुर

परिचय: रश्मि ठाकुर पेशे से शिक्षक हैं और कविताएँ लिखने का शौक है।आप मध्यप्रदेश के दमोह जिले के खमरिया(बिजौरा) में रहती हैं।लिखने का शौक बचपन से ही है,पर तब समय नहीं दे पाई। अब फिर से प्रेम विरह की रचनाओं पर पकड़ बनाई और प्रेम काव्य सागर से सम्मानित किया जा चुका है। पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है। सोशलिस्ट मीडिया पर भी आप सक्रिय हैं। रश्मि ठाकुर की जन्मतिथि-३ सितम्बर १९७७
तथा जन्म स्थान-खमरिया (दमोह) है। बी.ए.,एम.ए. के साथ ही बी.एड करके शिक्षा को कार्यक्षेत्र(स्कूल में सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका)बना रखा है। आपके लेखन का उद्देश्य-झूठ छल फ़रेब औऱ अपने आसपास हो रही घटनाओं को नज़र में रखते हुए उनका वास्तविक चित्रण रचनाओं के माध्यम से करना है।

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