रावण अब भी जिंदा है…

hemant saral
दशहरे का दिन तुम देखो,
आज फिर से आया है।
हर गली-मुहल्ले में,
फिर रावण जलाया है॥
बुराई का अंत हुआ था,
विजय राम ने पाई थी।
अयोध्या को मिले राम फिर,
घर-घर बँटी मिठाई थी॥
स्वर्ग तुल्य बनी थी धरती,
रामराज्य ने जन्म लिया।
बजरंग बन इस दिन शिव ने,
दुष्टों का था दमन किया॥
महा ब्राह्मण था रावण फिर भी,
वंश नाश का कारण बना।
भूल हुई थी उससे घोर,
सीता माँ का हरण किया॥
शिव का महान भक्त था रावण,
तीनों लोक का राजा था।
अंहकार के ही कारण,
बजा उसका बाजा था॥
नहीं बदला है अब भी कुछ,
रावण अब भी जिंदा है।
राजनीति में घुसकर बैठा,
आतंक फैलाना धंधा है॥
महंगाई है इसकी रणनीति,
बेरोजगारी है हथियार।
खत्म करने अच्छाई को,
मुँह खोले बैठा तैयार॥
आगे बढ़ो देश के वीरों,
हथियार उठा लो हाथों में।
कुछ भी रखा नहीं है मित्रों,
इन जात-पात की बातों में॥
साथ मिलकर चले तो यारों,
एक दिन ऐसा आएगा।
भ्रष्टाचार,महंगाई रूपी,
रावण ये ढह जाएगा॥
#हेमन्त कुमार ‘सरल’
परिचय:  हेमन्त कुमार का उपनाम ‘सरल’ है। अभी स्नातक में अध्ययनरत हैं। आपको कविताओं को लिखने-पढ़ने का शौक है। आपका निवास हरियाणा के हिसार स्थित पड़ाव चौक में है।

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