`डेंगू` तुम `हनीप्रीत` को भी ले आए

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sunil jain
तुम आ गए,आ जाओ अब तो हनीप्रीत भी आ गई। तुम पर हिंसा के आरोप लगे हैं,उस पर भी लग रहे हैं। बड़े ही धीरे-धीरे सधे कदमों से आ रहे हो। हनीप्रीत जब साथ हो तो भला तेज कैसे चला जा सकता है। तुम्हारे आने की आहट और हनीप्रीत के पकड़े जाने की खबर से मीडिया ऐसे उछला जैसे भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला हो। तुम अकेले नहीं आ सकते थे,इसलिए हनीप्रीत को साथ ले आए। आखिर क्या रिश्ता है तुम्हारा और हनीप्रीत का? बाप और बेटी का तो हो नहीं सकता।
किसी बाबा की तरह चुपके से अपना आधार बना रहे हो। तुम्हारा आधार तो पहले भी था। तुम्हारे आने की आहट क्या सुनी,अखबारनवीस अस्पतालों की नींव खोदकर सूंघने लगे। अभी-अभी कुछ दिन पहले उन्होंने हनीप्रीत को सूंघा और ऐसा सूंघा कि,वह सीधे बाबा जी की शरण में वाया पुलिस जा पहुंची। मुझे तो लगा था,तुम भी किसी बाबा के आश्रम में फंस गए हो। इस बार नहीं आओगे। कल जब अखबार देखा,तुम बड़े सधे और दबे कदमों से शहर में घुस रहे हो तो अच्छा लगा। खून के रिश्ते समझ में आएंगे। रिश्ता खून का,पहचाने जाएंगे। मुख्यमंत्री तीन साल में पहली बार अस्पतालों में घुसकर तुम्हें बिना लाठीचार्ज के भगाने की कोशिश में लग गए। दो-चार निलंबित होंगे। प्रधानमंत्री का झाड़ू लिए चित्र गली मुहल्ले में तुम्हारे आहट की डर से टांग दिए गए हैं। महात्मा गांधी के चश्मे से झांकता `स्वच्छ भारत` नपाकर्मियों को नहीं दिखाई देता,और न ही वह चश्मे से बाहर आता।
बहुत दिनों से चौराहे पर कूड़ा पड़ा,सभी महात्मा गांधी को याद कर रहे हैं। तुम भी आओ और थोड़ा-सा धमका दो इनको। ये सभी पूरी ताकत से याद करने लगेंगे। बापू का स्वच्छता अभियान चल रहा है। सभी सफाई में जुटे हैं, इसीलिए नगर पालिका कर्मचारी नहीं जुटे। जब सभी सफाई कर रहे हैं,तो हमें क्या जरूरत है सफाई करने की। तुम तो मौका परस्त हो। जरा-सा खुला अंग देखा,चिपट जाते हो। गन्दगी फैली पड़ी है,दो-चार को लुढ़का दो। टीआरपी बढ़ जाएगी। बाबा,डॉक्टर,डाकू सभी की पौ बारह हो जाएगी। विपक्ष को एक मुददा और मिल जाएगा। ये सरकार कुछ नहीं करती। डेंगू मच्छर नर है या मादा,अभी तक इसी विवाद में फंसी है।
आखिर मुझे तो तब‍ मालूम पड़ा,जब मेरे कूलर में एक सरकारी आदमी को घुसे पाया। भई इस कूलर में क्या तुम भ्रष्टाचार ढूंढ रहे हो,या फिर हनीप्रीत ढूंढने आए हो। कुछ लोग पिछले साल इसमें माल्या को ढूंढने आए थे। बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला। बाहर निकलने के लिए उन्हें काला घोड़ा चाहिए। मैं सूफी आदमी काला घोड़ा कहां से लाता। कभी रेसकोर्स की तरफ मुंह करके नहीं देखा। पाकिस्तानी सुरंग समझकर हर कोई आतंकवादी ढूंढने कूलर में घुस जाता है। कोई पीने घुसने आ जाता है,कुछ लोग बाबा की गुफा समझ बेटियों को ढूंढने चले आते हैं। कुछ बेरोजगार,रोजगार की तलाश में घुसते पाए गए। इस कूलर में डेंगू या डेंगी का मच्छर ही नहीं घुस पाता,लेकिन बाकी सभी घुस जाते हैं।
जब भी तुम आते हो,तुम्हारे आने से पहले नगर पालिका वाले धमकाते हैं, कुछ पाउडर दे जाते हैं। धुंआ छिड़कने वाले को दो-तीन बार बोलने के बाद भी नहीं आता। तुम्‍हारे आने की सूचना पावडर के माध्‍यम से दे जाते हैं। टंकियों के ढक्कन लगवा जाते हैं। नालियां बहती हैं,वहां पर मच्‍छर नहीं होता,वहां तो आदमी का नवजात बच्‍चा पड़ा होता है। चलो अच्‍छा हुआ तुम आ गए। डॉक्‍टर साहब बहुत दिनों से मुंह पर सेलो टेप चिपकाए बैठे थे। अब हर मरीज से कह सकेंगे। ‘अच्‍छा हुआ ले आए,अगर दो घंटा लेट हो जाते,तो आपका बंदा हमेशा के लिए लेट जाता।’
डेंगू के आने की खबर और हनीप्रीत के पकड़े न जाने की खबर से सभी परेशान थे। अब ठीक है-पहले कौन?

                                                                  #सुनील जैन राही
परिचय : सुनील जैन `राही` का जन्म स्थान पाढ़म (जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद ) है| आप हिन्दी,मराठी,गुजराती (कार्यसाधक ज्ञान) भाषा जानते हैंl आपने बी.कामॅ. की शिक्षा मध्यप्रदेश के खरगोन से तथा एम.ए.(हिन्दी)मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया हैl  पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन देखें तो,व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी आपके नाम हैl कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में आपकी लेखनी का प्रकाशन होने के साथ ही आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हुआ हैl आपने बाबा साहेब आंबेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया हैl मराठी के दो धारावाहिकों सहित 12 आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैंl रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 45 से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैंl कई अखबार में नियमित व्यंग्य लेखन जारी हैl 

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।