दहेज

jyoti mishra

लाखों घर बर्बाद हो गए इस दहेज की बोली में,

अर्थी चढ़ी हज़ारों कन्या बैठ न पाई डोली में।

कितनों ने अपनी कन्या के पीले हाथ कराने में,

कहाँ-कहाँ है माथा टेका,शर्म आती बतलाने में।

क्यों टूट रहे परिवार रोज ही,क्यों फूट रही हैं तकदीरें,
लोभी फिर भी खोज रहे,नित शोषण की तदबीरें।

अब तो लालच छोड़,मिल जाओ मानव टोली में,
अर्थी चढ़ी हज़ारों कन्या….॥

ऐ नवजवान युवक क्यों तू बनता आज भिखारी है,
खून कलेजे का पी जाती हाय ये कैसी बीमारी है।
जिस पर बीती,वही जानता बात नहीं ये कहने की,
जीवनभर का क़र्ज़ लद गया,सीमा टूटी सहने की।
गहने,खेत,मकान बिक गए,इस दहेज़ की बोली में,
अर्थी चढ़ी हज़ारों कन्या….॥

पति-पत्नी के बीच खाइयां खोदी इस शैतान ने,
सास-बहू को शत्रु बनाया ,देखो इस हैवान ने।
अब भी बे-मतलब की देखो रार मचाई जाती है,
क्यों दहेज़ के लिए आज भी,बहू जलाई जाती है।
दानवता क्यों घुस आई राम-राज की टोली में,
अर्थी चढ़ी हज़ारों कन्या….॥

अब तक रुके न ये इंसान मानवता की भाषा में,
लड़के वाले दरें बढ़ाते, बस धन की अभिलाषा में।
क्या यही हमारा मनुज रुप है,और अहिंसा प्यारी है,
लड़की वालों की गर्दन पर हरदम रखे एक कटारी है।
आग लगे ऐसे दहेज़ की दानवता की टोली में,
अर्थी चढ़ी हज़ारों कन्या….॥

अब भी चेतो लड़के वालों,कन्याओं की शादी में,
नहीं बंटाओ हाथ,इस तरह तुम ऐसी बर्बादी में।
तुमको भी ऐसा दुख होगा,जब ऐसा दिन आएगा,
अथवा ये बेबस का पैसा तुमको रास न आएगा।
नहीं मिलाओ जहर दहेज का,आज माँगकर रोली में,
अर्थी चढ़ी हज़ारों कन्या,बैठ न पाई डोली में॥

                                                              #डॉ.ज्योति मिश्रा
 परिचय: डॉ.ज्योति मिश्रा वर्तमान में बिलासपुर(छत्तीसगढ़) में कर्बला रोड क्षेत्र में रहती हैं। आपकी उम्र करीब ५८ वर्ष और शिक्षा स्नातकोत्तर है। पूर्व प्राचार्या होकर लेखन से सतत जुड़ी हुई हैं। प्रकाशन विवरण में आपके नाम साझा काव्य संग्रह ‘महकते लफ्ज़’ और ‘कविता अनवरत’ है तो,एकल संग्रह ‘मनमीत’ एवं ‘दर्द के फ़लक’ से है। कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कविताएं छप चुकी हैं।आपको युग सुरभि,हिन्दी रत्न सहित विक्रम-शिला हिन्दी विद्यापीठ (उज्जैन,२०१६),तथागत सृजन सम्मान,विद्या-वाचस्पति,शब्द सुगंध,श्रेष्ठ कवियित्री (मध्यप्रदेश),हिन्दीसेवी सम्मान भी मिल चुका है। आप मंच पर काव्य पाठ भी करती रहती हैं। आपके लेखन का उद्देश्य अपनी भाषा से प्रेम और राष्ट्र का गौरव बनाना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।