अक्षर देह के रूप में डॉ. बेचैन हमारे बीच हैं- डॉ. जैन

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डॉ. बेचैन के प्रथम पुण्य स्मरण पर स्मरण सभा आयोजित

डॉ. बेचैन जी की अनुभूतियाँ हमारे साथ- गौरव साक्षी

इन्दौर । मातृभाषा उन्नयन संस्थान व डॉ. कुँअर बेचैन स्मृति न्यास, ऑस्ट्रेलिया द्वारा संयुक्त रूप से इन्दौर, मध्यप्रदेश में डॉ. कुँअर बेचैन जी के प्रथम पुण्य स्मरण पर स्मरण सभा रखी।

स्मरण सभा में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने कहा कि ‘गुरुदेव डॉ. कुँअर बेचैन जी हिन्दी कवि सम्मेलनों के शिखर कलश रहे हैं और आज भी अक्षर देह के रूप में हमारे साथ हैं।’

युवा कवि गौरव साक्षी ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि ‘दादा असमय हमें शरीर से दूर हो गए पर निश्चित रूप से आज भी आपकी अनुभूतियाँ हमारे साथ हैं।’
स्मरण सभा में हरेश दवे, नितेश गुप्ता, रोहित त्रिवेदी, अवनीश पाठक सूर्य, आशीष पँवार, विघ्नेश दवे आदि सम्मिलित हुए।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।