हसरतें सब आपकी मौला करे फूले-फलें,
हर कदम खुशियाँ तुम्हारी हमकदम बन कर चलें।
इन लबों पर हो तराने प्रीत के,मनमीत के,
ज़िन्दगानी के चमन में फूल खुशियों के खिलें।
ज़िन्दगी में ज़िन्दगी,बस ज़िन्दगी की बात हो,
शाम सिन्दूरी हमेशा,गुनगुनाती रात हो।
है दुआ रब आपके हर ख्वाब को पूरा करे,
ज़िन्दगी में प्रीत की,बस प्रीत की बरसात हो।
उम्रभर इक दूसरे के दिल जिगर बनकर रहो,
ज़िन्दगी के हर सफ़र में हमसफ़र बनकर रहो
गम रहे या कि, खुशी ये साथ छूटे ही नहीं,
एक-दूजे की मुहब्बत की नज़र बनकर रहो।
ज़िन्दगी के हर सफ़र में रंग खुशियों के मिलें,
कामना मेरी यही है फूल खुशियों के खिलें।
आपकी हर आरजू पूरी करे परमात्मा,
आपने देखा किए जो ख्वाब,वो सारे पलें॥
#सतीश बंसल
परिचय : सतीश बंसल देहरादून (उत्तराखंड) से हैं। आपकी जन्म तिथि २ सितम्बर १९६८ है।प्रकाशित पुस्तकों में ‘गुनगुनाने लगीं खामोशियाँ (कविता संग्रह)’,’कवि नहीं हूँ मैं(क.सं.)’,’चलो गुनगुनाएं (गीत संग्रह)’ तथा ‘संस्कार के दीप( दोहा संग्रह)’आदि हैं। विभिन्न विधाओं में ७ पुस्तकें प्रकाशन प्रक्रिया में हैं। आपको साहित्य सागर सम्मान २०१६ सहारनपुर तथा रचनाकार सम्मान २०१५ आदि मिले हैं। देहरादून के पंडितवाडी में रहने वाले श्री बंसल की शिक्षा स्नातक है। निजी संस्थान में आप प्रबंधक के रुप में कार्यरत हैं।