मैं अधूरी ही तो हूँ..

2
kumari archana
मैं अधूरी ही तो हूँ,
उस आधी भरी ग्लास जैसी।
अधूरा,अधूरा ही तो
सब कुछ मेरा तुम बिन,
स्त्रीत्व अपूर्ण है मेरा
बिन पुरूष तुम्हारी संगिनी बने,
बिन मातृत्व सुख के।
और आज भी है
मेरी रात अधूरी है,
दिन उदासी है
साँझ प्यासी है,
सुबह आशाई है।
मैं इतजार में हूँ
बिस्तर भी,
तकिया भी
दीवारें भी,
खिड़कियाँ और
दरवाजे भी,
सबके सब खुले हैं
मेरी आँखें भी,
बस एक
तुम्हारे मेरे होने के॥

                                                                     #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला हरिश्चन्द्रपुर(पूर्णियाँ) की निवासी हैं।

matruadmin

2 thoughts on “मैं अधूरी ही तो हूँ..

  1. कविता में बिम्ब का अद
    भुत सामंजन है जो हृदय को स्पदंदित करता है.लेकिन भाव व्यंजना से परिलक्षित पितृसत्तात्मकता अग्राह्य.

  2. उम्दा लेखन शैली
    पर नारी स्वं में पूर्ण है
    नहि कोई विराम
    नहि कोई शेषाशब्द
    नारी तू न्यारी है
    जग में सबसे प्यारी है ।

Comments are closed.

Next Post

माँ की विदाई

Wed Sep 20 , 2017
क्या हुआ कि,आज माँ घर से पराई हो रही है, दो वक्त की रोटी की खातिर माँ की विदाई हो रही है। बंट रहे हैं घर-मकाँ, माँ- बाप भी बंटने लगे हैं, हो गया व्यापार, रिश्तों की जुदाई हो रही है॥                   […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।