पुरुषार्थ  की गीता  सुना दो

anupam
हे मुरारी,मदन मोहन फिर नए सपने बुना दो,
हैं खड़े अर्जुन भ्रमित,पुरुषार्थ की गीता सुना दो।
नींव तक निज संस्कारों की उखड़ती जा रही है,
रक्ष संस्कृति की पुन: विष बेल बढ़ती जा रही है।
दिग्भ्रमित धरमावलंबी  टोलियों  में बंट गए हैं,
ज्ञान  के भंडार  सारे अब धरा पर घट गए हैं।
आज इस कुरुक्षेत्र में आ चक्रव्यूह अपना चुना दो,
हैं खड़े अर्जुन भ्रमित फिर कर्म की गीता सुना दो।
स्वार्थ  में  धृतराष्ट्र  डूबे ~चाह  में  सत्ता बढ़ी  है,
गोपियों की  चीख से ब्रजभूमि तक आहत खड़ी है।
गाय, गंगा और गीता  खो  रहीं अस्तित्व   अपना,
साधना  पथभ्रष्ट  होकर  रह  गई है सिर्फ सपना।
आर्य भू  की  शौर्यता प्रभु सुप्त रुधिरों को गुना दो,
हैं खड़े अर्जुन भ्रमित  पुरुषार्थ की गीता सुना दो।
याद  है ~तुमने  कहा  था ~ दौड़कर आ आएगा,
जब  धरा  पर  पाप  का~परचम कुटिल फहराएगा।
देख  लो  बृजराज  कैसा ~पाप  का सूरज  चढ़ा है,
धर्मध्वज  घूमिल  हुआ, मानव  पतन के पथ बढ़ा  है।
आज फिर अवतार ले हरि निज वचन को गुनगुना दो,
हैं  खड़े  अर्जुन  भ्रमित  पुरुषार्थ  की गीता  सुना दो।

                                                #अनुपम कुमार सिंह ‘अनुपम आलोक’

परिचय : साहित्य सृजन व पत्रकारिता में बेहद रुचि रखने वाले अनुपम कुमार सिंह यानि ‘अनुपम आलोक’ इस धरती पर १९६१ में आए हैं। जनपद उन्नाव (उ.प्र.)के मो0 चौधराना निवासी श्री सिंह ने रेफ्रीजेशन टेक्नालाजी में डिप्लोमा की शिक्षा ली है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।