ज़ूम

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anju motvani
आदत हो गयी है
मेरी उँगलियों को
मोबाइल पर दिन भर
थिरकने की
अँगूठे और तर्जनी को
मिलकर कुछ खोजने की
चीज़ों को बारीकी से
परखने की
आदत भी ऐसी कि
अब तो अखबार हो या
हाथ में कोई पुस्तक
लगता है ज़ूम कर लो
सोचो ,कभी तुम्हे ही
ज़ूम कर लिया तो
तुम्हारी हर कमी
तुम्हारे दिल में
क्या क्या है
सब एकदम स्पष्ट
हो जायेगा
बिल्कुल क्लियर
तुम्हारे चेहरे के
आते जाते भाव
तुम्हारी आँखों में
मेरी तस्वीर है कि नहीं
तुम्हारी आँखों को
ज़ूम करके
देखना चाहूंगी कि
उनमें गुस्सा है कि प्यार
माथे की शिकन
कितनी गहरी है
होंठ कुछ कहने की
कोशिश में हैं कि
चाह कर भी
सावधान की मुद्रा में हैं
हाँ , यह भी
 हो सकता है कि
जो मुझे महसूस
न होता हो
वो  छुपा हुआ प्यार भी
परत दर परत
नज़र आ जाये
चलो , जीवन के
खट्टे मीठे लम्हों को
ज़ूम कर लें
तुम मुझे ज़ूम कर लो
मैं तुम्हे ज़ूम कर लूँ

        परिचय 

नाम ——अंजू मोटवानी 
प्रकाशन —–कई समाचार पत्रों ,पत्रिकाओं , साझा काव्य संग्रहों में रचनायें प्रकाशित , काव्य संग्रह ‘ दूर कहीं ‘ एवं ग़ज़लों की cd प्रकाशित 
सम्मान —— कई सहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित 
पता —-देवास (म .प्र )

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।