शहर के ख्यात रसूखदारों में से एक करोड़पति नयनसुख ने अपनी बिटिया के विवाह से चार दिन पूर्व से ही महंगा डीजे मंगा लिया। संगीत की कानफोडू धुनों व भद्दे गीतों पर नृत्य का सिलसिला रात के दो-दो बजे तक अनवरत जारी रहता।
चौथे दिन बारात आई और अगले दिन बिदाई के बाद मोहल्ले को शोर के तापमान से राहत मिली।
कुछ दिन बाद रामभरोसे ने अपने बेटे के जन्मदिन पर रामायण पाठ रखा। शाम को रामायण पाठ शुरु हुआ,अभी रात्रि के दस भी नहीं बजे थे कि,अचानक एक सिपाही वहां आ पहुंचा और लाउडस्पीकर को बंद करने का निर्देश देकर जाने लगा। चिंतित रामभरोसे ने बडी मासूमियत से शिकायतकर्ता का नाम पूछा तो जवाब मिला-‘हैं कोई शांतिप्रिय भाई नयनसुख जी।’
#कार्तिकेय त्रिपाठी
परिचय : कार्तिकेय त्रिपाठी इंदौर(म.प्र.) में गांधीनगर में बसे हुए हैं।१९६५ में जन्मे कार्तिकेय जी कई वर्षों से पत्र-पत्रिकाओं में काव्य लेखन,खेल लेख,व्यंग्य सहित लघुकथा लिखते रहे हैं। रचनाओं के प्रकाशन सहित कविताओं का आकाशवाणी पर प्रसारण भी हुआ है। आपकी संप्रति शास.विद्यालय में शिक्षक पद पर है।
Wed Aug 9 , 2017
भीनी-सी खुशबू लेकर सुबह उठी है, अभी अभी। कुछ-कुछ अलसाई, कुछ-कुछ जागी-सी। भोर होने से पहले ही तिमिर में जागी-सी, ताजी-ताजी-सी। पहरुए उजालों के आने हैं अंधियारों के भूत, जाने को हैं। बारिश में भीगे पंछी अभी कहाँ उड़ जाने हैं, खुली राह विस्तारों की। नए दिवस का स्वागत उजास […]