शिव अवतरण

0 0
Read Time44 Second

कलियुग में ऐसा भी होना था
कोरोना का पाप हमे ढोना था
गंगाजल की कांवड बंद हो गई
गंगाजल बिकने को आ गई
डाक विभाग गंगाजल बेच रहा
घर से ही जलाभिषेक हो रहा
सच मे शिव रात्रि बदल गई है
शिवालय के द्वार बंद हो गए है
घर मे रहकर शिव स्तुति गाओ
विकार छोड़ पवित्रता अपनाओ
अंधकार से प्रकाश हो जाएगा
ज्ञान का सूर्योदय नज़र आएगा
शिव अवतरण का यही दिवस है
शिव परमात्माये नमः मन्त्र है।
#श्रीगोपाल नारसन

matruadmin

Next Post

प्यारे मियां का कश्मीर कनेक्शन..

Sun Jul 19 , 2020
हिंदुस्तान के ह्रदय स्थल मध्यप्रदेश, में पिछले दिनों घटित दो अकल्पनीय घटनाओं, अकल्पनीय इसलिए कहा जा सकता है जिसके द्वारा अपराध की कल्पना भी न कि जा सके अगर रक्षक ही भक्षक बन जाये तो न्याय और विस्वास की उम्मीद किससे करे।इन दो घटनाओं नें प्रशासनिक व्यवस्था को शर्मसार कर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।