एक पिता
तिनका-तिनका जोड़कर,
अपना घरोंदा बनाता है
फिर पता नहीं क्यूँ,
हड्डियां कमजोर होने पर
वो उसी घर से
बाहर हो जाता है l
रोम-रोम से
वात्सल्य लुटाता है,
बच्चों के अनकहे
ह्रदय के भाव समझ जाता है,
मगर अपनी आवश्यक
जरूरतों को तरस जाता है l
#पुष्पेन्द्र जैन ‘नैनधरा’
परिचय : पुष्पेन्द्र जैन ‘नैनधरा’ का सागर(मध्यप्रदेश) के गोपालगंज में निवास है। आप यहीं पर टाइल्स- मार्बल और सेनेटरी का व्यवसाय करते हैं। साथ ही कविताएं और लेख लिखने का शौक भी रखते हैं। कविता लेखन में विशेष रुचि है। १००० से अधिक रचनाएं लिख चुके हैं,जो कई संचार माध्यमों से प्रकाशित भी हुई हैं।
Sat Aug 5 , 2017
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