(भाग २)
हंगामा हो गया,जब सरला के पिताजी सरला को हाथ पकड़कर बाजार से घर ले आए। आँखों में गुस्से की पिचकारी छूट रही थी। गाली-गलोच..मारपीट पर उतर आए,बीच-बचाव में उनकी माँ आई तो उनको भी थप्पड़ जड़ दिए। ऐसा लग रहा था कि, शर्मा जी आपा खा चुके थे।
-मेरी बेटी ने ऐसा क्या कर दिया,जो आप इस तरह ले आए? आपकी इकलौती बेटी है,इसे क्यों पीट रहे हो? सरला की माँ ने थर-थर काँपते हुए पूछा।
-पूछ तेरी लाड़ली को…मेरी इज्जत का जनाजा निकाल दिया भरे बाजार में…एक लड़के के साथ कसकर चल रही थी…ये सब तेरी वजह से हो रहा है।
पूछ इसे,इसलिए इसे टॉप टेन कॉलेज में पढ़ा रहा हूँ,ताकि ये आवारा लड़कों के साथ गुलछर्रे उड़ाए,..ऐसा जोर से बकते हुए दो थप्पड़ और जड़ दिए।
तभी चिल्लाती हुई सरला की माँ आई और पैर पकड़कर बोली
-एक बार इसे माफ़ कर दो…ये अभी बच्ची है।
-तुम इसे बच्ची कहती हो…अरे ये अंतिम वर्ष की छात्रा है…आज से इसका बाहर आना-जाना बन्द….अगर ये बाहर निकल गई तो तेरी खैर नहीं…ऐसा कहते हुए पिताजी ने कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया।
सरला चिल्लाती रही…’पापा सुनो तो….ऐसा मत करो …एम सॉरी पापा…’ पर शर्मा जी ने ध्यान नहीं दिया। बस एक बार अपनी पत्नी की ओर देखा, आँखों में गुस्सा फूट रहा था-जैसे गर्मा-गर्म लावा।
-ध्यान रखना इसका…ऐसा बोलकर चल दिए।
सरला बन्द कमरे में रोती रही,बिलखती रही, पर कुछ देर तक किसी की हिम्मत नही थी कि, दरवाज़ा खोल दे।
कुछ घंटे बाद माँ ने दरवाज़ा खोला तो उन्हें देखकर सरला गले मिलकर फूट-फूटकर रोने लगी।
-ये क्या कर दिया बेटी?
-प्यार करना कोई गुनाह है माँ!
-नहीं बेटी,पर प्यार…?
-‘हां एक बनारसी बाबू,जो यहाँ दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है राजीव। बहुत अच्छा लड़का है,जाने-अनजाने में दिल दे बैठी।’
सुनकर माँ के पैरों तले से जमीन खिसक गई।
-तेरे पापा सही कहते हैं, तू बड़ी हो गई …तुमने कुछ भी सोचे-समझे बिना ही दिल का रोग ले लिया…और तुम्हारे पापा की आदत को जानती हो न…भगवान जाने क्या होगा। चिंतित स्वर से माँ ने कहा।
-चिंता मत करो माँ,राजीव बहुत अच्छा लड़का है,वो मेरा बहुत ख्याल रखता है।
-प्लीज़ बेटी,कुछ दिन तक चुप रह,नहीं तो तेरा बाप तेरे साथ-साथ मुझे भी मार देगा..,ऐसा कहते हुए माँ बाहर निकल गई।
सरला की चिंता बढ़ गई। उधर राजीव को पता चला तो,उसका जीना हराम हो गया। वक़्त बीतता गया,जुदाई में बिन पानी की मछली तरह दोनों तड़पने लगे। न भूख लगे,न प्यास..बस एक-दूजे को याद करते चले। सरला ने हजार बार अपनी माँ से याचना की,पर शर्मा जी के डर से माँ कुछ नहीं कर पाई।
एक दिन मौका पाकर सरला घर से भाग गई और राजीव से जा मिली। दोनों जी भर के गले मिले,चेहरे खिल उठे,नाच उठा मन का मयूर…। आज जी भर के बातें की और खाना खाया। इसके बाद दोनों ने मंदिर में शादी करने का फैसला किया।
शाम ढल गई थी,दोनों काफी दूर चले गए और मंदिर में शादी कर ली। फिर क्या धर कोसों चलते रहे,भागते रहे चोरों की तरह।
कुछ दिन बाद पकड़े गए और पुनः अलग कर दिए गए। राजीव को बेरहमी से पीटा गया।
‘न…नहीं …प्लीज़ मारो मत,’ सरला चिल्लाती रही पर,किसी ने नहीं सुनी और वो अचेत हो गई।(शेष अगले भाग में..)
#एल.आर. सेजू
परिचय : एल.आर. सेजू थोब राजस्थान की तहसील ओसिया(जिला जोधपुर) में रहते हैं।आपको हिन्दी लेखन का शौक है। अधिकतर लेख लिखते हैं।