ह्र्दयमोहिनी

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ईश्वर ने भेजा था उनको
ईश्वरीय सेवा करने के लिए
शोभा से ह्र्दयमोहिनी बनी
जनकल्याण करने के लिए
आठ साल की बाली उम्र में
उनमें रूहानियत आ गई थी
परमात्म साक्षात्कार हुआ
उनकी काबिलियत छा गई थी
चार दर्जे तक पढाई करके
कई भाषाओं की ज्ञाता बनी
ईश्वरीय वरदान ऐसा मिला
हर एक की प्रणेता बनी
परमात्मा की अजब सेवा से
ह्र्दयमोहिनी गुलज़ार हुई
आध्यात्मिकता में डॉक्टरेट
सम्मान से वह भरपूर हुई
उछलकूद अल्हड़ मस्ती
उन्होंने कभी जानी नही
शांति, धैर्य,योग साधना में
था उनका कोई सानी नही
उन्ही के तन को रथ बनाकर
परमात्मा हमसे बतियाते रहे
कलियुग से सतयुग आएगा
यह सत्य हमे समझाते रहे
पवित्र से पावन बनाने की
विधि उन्होंने ही बताई थी
चरित्र निर्माण की अलख जगा
दुनिया को राह दिखाई थी
93 वर्षों का जीवन उनका
परमात्म सेवा के नाम रहा
नारी शक्ति की अग्रदूत रुप मे
ह्र्दयमोहिनी का नाम रहा।
#श्रीगोपाल नारसन
सपना (स.अ.)
जनपद-औरैया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।