श्री हरि से ही सब नाते हैं

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vinay
बिखर रहे क्यों देह धर्म से,
आत्म धर्म से एक बनो तुम..
परिजन तेरे प्रभु सेवा को,
सेवामय सब कार्य करो तुम..
नहीं देह का नाता जग से,
श्री हरि से ही सब नाते हैं॥
सभी चराचर प्रभु शरीर हैं,
उसके हेतु कार्य करो तुम..
विषम दृष्टि से मत देखो तुम,
यह तो श्रीहरि की क्रीड़ा है..
लड़ना मरना राग-द्वेष तो,
निज मन से पनपी पीड़ा है..
नहीं देह का नाता जग से ,
श्रीहरि से ही सब नाते हैं॥
आत्म धर्म से एक ही हो तुम,
वल्लभ दर्शित कर्म करो तुम..
प्रभु के नाते सब अपने हैं,
नहीं पराया और वीराना..
स्मरण करो तुम सभी व्रती हो,
सेवामय पर कर्म करो तुम..
नहीं देह धर्म का नाता जग से,
श्रीहरि से ही सब नाते हैं।
श्रीहरि से ही सब नाते हैं॥

                                                                                       #विनय पान्डेय

परिचय : विनय पान्डेय मध्यप्रदेश के कटनी में रहते हैं। आपका व्यवसाय पान्डेय ग्रुप आफ कम्पनीज प्राईवेट लि. है। एमबीए की शिक्षा पा चुके श्री पाण्डेय की विशेष रूचि मुक्तक,छंद, ग़ज़ल और हास्य कविता लिखने में है। उपलब्धियों की बात करें तो,कवि सम्मेलन और मुशायरा समूह का सफलतापूर्वक संचालन करते हैं। कई पत्रिका एवं समाचार-पत्र में कविताएँ प्रकाशित होती हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।