दर्द का रिश्ता

rajlaxmi
   वो पंजाबी लड़की थी, ऊँची पूरी
तेजतर्रार और नामी लेखिका भी। शादी हुई,बच्चे भी हुए,किंतु अलगाव हो गया।
    बच्चे बड़े हो गए तो वह अकेली हो गई। घर का सारा काम उसे ही करना
पड़ता। एक दिन बाजार से सामान लाते
समय उसकी स्कूटी बंद हो गई। अब
क्या करे,तभी एक युवक उसके पास
आया। उसने स्कूटी ठीक कर दी।
‘क्या आप मुझे घर तक छोड़ देंगे। आज सुबह से ही चक्कर आ रहे हैं।
‘जी बिलकुल।’
वह युवक घर  छोड़ने आया तो पता चला दवाइयाँ लेना तो भूल ही गई। उसी ने दवाई  भी ला दी।
अब तो यह रोज का क्रम था। कार्यालय के बाद सीधा आता। साथ-साथ चाय पीते।
‘मैं अकेला हूँ, मैंने  शादी नहीं  की।’
वह बहुत परेशान था। उसका मकान मालिक घर खाली करने को
कह रहा था। उनकी बेटी की शादी थी।
‘ऊपर एक कमरा है। बच्चे तो कभी-
कभी ही आते हैं। आप चाहे तो –।’
‘लोग क्या कहेंगे। अभी ही तो आता
हूँ तो जाने कैसे  देखते हैं।’
‘मुझे परवाह नहीं है,लोग क्या सोचते हैं। उस दिन तुम भी ओरों की तरह अनदेखा करके जा सकते थे। हमारा रिश्ता एक दर्द का रिश्ता है,पहले तुमने निभाया,अब मुझे निभाने दो।’
उम्र का फासला था। वो बड़ी थी,पर
जब तक वह स्वस्थ थीं पूरा ध्यान रखती।
‘पूरा घर तुम्हारे नाम से कर दिया है।’
‘पर—!’
तुमने मेरी जो सेवा की,उसे मेरे अपने भी नहीं कर पाए।’
    कितना पाक रिश्ता। बस दोनों  को एक ही दर्द था अकेले होने का। कितना मजबूत था यह दर्द  का रिश्ता..।
                                         #डॉ.राजलक्ष्मी शिवहरे

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।