विपिन के वाट्सऐप समूह पर एक वीडियो आया था। सन्देश था-अवश्य देखें और दूसरों के साथ साझेदारी करें। विपिन ने देखा तो दंग रह गया। मन ही मन सोचने लगा कि,यह तो समाज की शांति भंग कर सकता है।
वह भागकर पंचायत पहुँचा तो वहाँ उसी की चर्चा हो रही थी। माहौल गरमाया हुआ था। सभी बदला लेने की बात कर रहे थे। विपिन शांत स्वभाव का समझदार नौजवान था। वह जानता था कि असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के ज़रिए समाज में वैमनस्य पैदा कर रहे हैं।
एक दूसरे नौजवान ने कहा -`हमने भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं। ईंट से ईंट बजा देंगे।`
हालात बेकाबू होते देख विपिन ने समझाया -`सच जाने बिना इस तरह उत्तेजित होने से कुछ नहीं होगा,सिर्फ हिंसा बढ़ेगीl`
`अब कौन-सा सच जानना है? वीडियो देखा नहीं।`
`लेकिन अक्सर यह सब झूठ होता है।` विपिन ने समझाने का प्रयास किया।
सबके सिर पर खून सवार था। किसी ने भी उसकी बात नहीं सुनी। उसके सारे प्रयास व्यर्थ गए। अनर्थ न हो जाए,यह सोच विपिन ने पुलिस के पास जाकर सारी बात बता दी। पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में कर ली।
जांच के बाद पता चला कि,वीडियो जोड़-तोड़कर लोगों को भड़काने के लिए बनाया गया था। अब पुलिस गुनाहगारों की खोज कर रही थी।
#आशीष त्रिवेदी
परिचय : आशीष कुमार त्रिवेदी इंदिरा नगर,लखनऊ (उत्तरप्रदेश)में रहते हैंl आपका जन्म १९७४ का हैl सामाजिक विषयों पर कलम चलाते रहते हैंl