हम दिल से उन्हें हर बार सलाम करते हैं;
वो यूंही बेवफाई हमसे सरेआम करते हैंl
सीख लिया पत्तों ने पतझड़ में यूं संभलना;
खाक होने का फिर वो इंतज़ाम करते हैं।
न होना मायूस यूं हारकर तुम कभी भी;
हारकर कुछ लोग मुकद्दर को बदनाम करते हैं।
आती नहीं होशियारी कि खुद को सही कहें;
गलतियों से सीखकर हासिल मुकाम करते हैं।
देश को कुछ लोगों ने अपनी जागीर समझा है;
शब्दों के बाणों से फिर वो कत्लेआम करते हैं।
#कामनी गुप्ता
परिचय : कामनी गुप्ता जम्मू से हैं और एमएससी(गणित) किया हैl लिखना इनका शौक है,अभी तक छ: साझा संग्रह में शामिल हैं। दीपशिखा,सहोदरी सोपान,सत्यम प्रभात तथा महकते लफ्ज़ आदि इसमें प्रमुख हैंl विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कविता,ग़ज़ल और कहानी प्रकाशित होती हैं। निरंतर सीखने को ही यह लिखने की सफलता मानती हैंl
Wed Jun 28 , 2017
आज मुझे मित्र के पुत्र के जन्मदिन की पार्टी में जाने का अवसर मिला। जब मैं वहां पहुंची तो,पार्टी पूरे शबाब पर थी ,पाश्चात्य संगीत पर कुछ युवक-युवती थिरक रहे थे। थोड़ी देर में केक काटा गया,सभी अपनी मस्ती में मस्त थे,किन्तु बच्चे के दादा-दादीजी एक तरफ शांत मुद्रा […]
शानदार पंक्तियाँ
हर शब्द में जान हे
क्योंकि खुदा मेहरबान हे
डॉ हरीश “पथिक”