बहुत हुआ धरती का दोहन,
अब तो शर्म करो ए मानव।
दूषित हुआ है पर्यावरण,
थोड़ी दया करो ए दानव॥
जिसने दी हो हरियाली,
वो धरती माँ है कहलाती।
जिसने जहर पीकर अमृत दिया,
उस पर ही तूने अत्याचार किया॥
अब वो मीठी बयार नहीं है,
ये मनुपुत्र का प्यार नहीं है।
शेरों के घर नहीं बचे हैं,
वीरों का अपमान यही है॥
भूल गया क्या तू मानव,
प्रकृति के उपकार को।
दिया है जीवन जिसने,
प्रकृति के प्राणाधार को॥
मैंने जीवन में यह संकल्प लिया है,
धरती हरी-भरी हो,
अब यह ठान लिया है।
#प्रमोद बाफना
परिचय :प्रमोद कुमार बाफना दुधालिया(झालावाड़ ,राजस्थान) में रहते हैं।आपकी रुचि कविता लेखन में है। वर्तमान में श्री महावीर जैन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय(बड़ौद) में हिन्दी अध्यापन का कार्य करते हैं। हाल ही में आपने कविता लेखन प्रारंभ किया है।