मातृभाषा डॉट कॉम द्वारा मातृ दिवस पर कविता प्रतियोगिता आयोजित

यदि आप कविता लिखते हैं तो मातृ दिवस के उपलक्ष्य में मातृभाषा डॉट कॉम लाया है आपके लिए कविता लेखन प्रतियोगिता।
विशेष कविता प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है, जिसमें माँ या उनसे जुड़े विषय पर अपनी कविता लिखकर भेज सकते हैं, जिसका प्रकाशन मातृभाषा डॉट कॉम पर होगा।

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प्रतियोगिता के नियम:-
1. प्रतियोगिता में केवल मातृभाषा उन्नयन संस्थान के वार्षिक / आजीवन या राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ही भाग ले सकते हैं।

2. आपकी रचना देवनागरी लिपि में टंकित होनी चाहिए। 3. यह प्रतियोगिता पूर्णतः निःशुल्क है।

4. सभी प्रकार की पद्य सकारात्मक रचनायें मान्य हैं।
5. विषय- माँ या उनसे जुड़े विषय

6. रचना में किसी भी प्रकार के अश्लील, असामाजिक व राष्ट्र विरोधी शब्द नहीं होने चाहिए और न ही इससे सन्दर्भित कोई रचना मान्य है।

7. एक रचनाकार केवल एक ही रचना भेज सकता है।

8. संस्थान के सम्पादक मण्डल व चयन समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ रचना का चयन किया जाएगा एवं विजेता का नाम 14 मई 2023 को घोषित कर उन्हें उपहार व डिजीटल प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

9. चयन पैनल का निर्णय सर्वमान्य होगा।

10. रचना के नीचे रचनाकार की सामान्य जानकारी, जैसे- नाम, पता, सम्पर्क सूत्र, ई-मेल आदि अवश्य लिखा होना चाहिए एवं एक पासपोर्ट फ़ोटो ज़रूर संलग्न करें।

प्रतियोगिता में शामिल होने व रचना भेजने की अंतिम तिथि 11 मई 2023 है, इसके बाद किसी भी रचनाकार की रचना स्वीकार नहीं की जाएगी। रचना, परिचय व फ़ोटो matrubhashaa@gmail.com पर ईमेल करना है या +919406653005 पर वॉट्सएप भी कर सकते हैं ।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।