अ.भा. साहित्य मेला में इंदौर के हरेराम वाजपेयी और मुकेश तिवारी सम्मानित

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इंदौर । विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) द्वारा अहमदनगर (महाराष्ट्र) में आयोजित अखिल भारतीय 18वां साहित्य मेला में इंदौर के दो वरिष्ठ रचनाकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार हरेराम वाजपेयी (इंदौर) को रजत पदक, मुकेश तिवारी (इंदौर) को पत्रकारश्री और मप्र की डाॅक्टर लता अग्रवाल (भोपाल) को लघुकथाश्री सम्मान दिया गया। न्यू आर्ट्स, काॅमर्स एंड साइंस काॅलेज, अहमदनगर में 24 और 25 सितंबर को हुए इस आयोजन में राष्ट्रीय संगोष्ठी के तहत विभिन्न सत्रों में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की स्थिति पर विचार-विमर्श भी हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्य, शिक्षा और पत्रकारिता जगत के लोगों की साहित्य मेले में मौजूदगी रही।

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मातृभाषा ने की नवोदित मंचीय कवियों को काव्य दीप सम्मान के लिए प्रविष्ठि आमंत्रित

Mon Sep 26 , 2022
इन्दौर। हिन्दी कवि सम्मेलन अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस शताब्दी वर्ष की स्मृतियों को स्थायी बनाने के उद्देश्य से कवि सम्मेलन की नवांकुर पीढ़ी को मातृभाषा उन्नयन संस्थान ‘काव्य दीप सम्मान’ से सम्मानित कर उन्हें हिन्दी कवि सम्मेलन के शताब्दी वर्ष से जोड़ेगा। मातृभाषा उन्नयन संस्थान […]

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।