मातृभाषा ने की नवोदित मंचीय कवियों को काव्य दीप सम्मान के लिए प्रविष्ठि आमंत्रित

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इन्दौर। हिन्दी कवि सम्मेलन अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस शताब्दी वर्ष की स्मृतियों को स्थायी बनाने के उद्देश्य से कवि सम्मेलन की नवांकुर पीढ़ी को मातृभाषा उन्नयन संस्थान ‘काव्य दीप सम्मान’ से सम्मानित कर उन्हें हिन्दी कवि सम्मेलन के शताब्दी वर्ष से जोड़ेगा।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘काव्य दीप सम्मान की स्थापना में देश के विभिन्न प्रान्तों से सौ नवांकुर कवियों का चयन किया जाएगा, और उनके सम्मान के लिए विभिन्न स्थानों पर आयोजन होंगे जिसमें उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के लिए नवांकुर कवियों को 30 नवंबर तक अपना परिचय, फ़ोटो व एक वीडियों का लिंक सहित सम्पर्क सूत्र, पता इत्यादि Kavisammelanshatabdi@gmail.com पर मेल करना होगा। चयन मण्डल प्रविष्ठि के चयन उपरांत सूचित करेगा।’

उन्होंने ये भी बताया कि ‘इस सम्मान हेतु आयु सीमा अधिकतम 35 वर्ष है। आवेदक के द्वारा बीते चार वर्ष में ही कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करना आरम्भ किया हो। यह सम्मान पूर्णतः मंचीय कवियों के लिए ही है।’

काव्य दीप सम्मान समारोह का आयोजन देश के अलग-अलग प्रान्तों में मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा किया जाएगा। सम्मान के लिए प्रविष्ठि पूर्णतः निःशुल्क है। समय सीमा में प्राप्त मंचीय कवियों की प्रविष्टियों पर ही चयन मण्डल चयन करेगा।

कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष

हिन्दी कवि सम्मेलन का इतिहास अपने सौ वर्ष पूर्ण कर रहा है। स्वाभाविक सी बात है कि आज हम इस इतिहास को समृद्ध देख रहे हैं, जबकि आरंभिक वर्षों में इसकी कोई ख्याति भी नहीं थी।
इस इतिहास को अमरता की दृष्टि से जनमानस के बीच पहुँचाने के उद्देश्य से भारत में हिन्दी भाषा के प्रचार के लिए प्रतिबद्ध ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ आपके साथ मिलकर देशभर में हिन्दी कवि सम्मेलन का शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है, जिसमें आपकी सहभागिता कवि सम्मेलनों के शताब्दी वर्ष को गौरव प्रदान करेगी।
संस्थान द्वारा शताब्दी वर्ष का प्रतीक चिह्न (लोगो) भी तैयार करवाया गया है। इस महोत्सव में मातृभाषा उन्नयन संस्थान राष्ट्रव्यापी सभी संस्थाओं, आयोजकों व समूह को साथ जोड़कर हिन्दी कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष को महनीय बनाने के लिए प्रयासरत है।
इस उत्सव का अभिनंदन देश के विभिन्न प्रांतों, नगरों में संस्थाओं द्वारा किया जाएगा। इस कड़ी में यदि आप भी सहभागी/सहयोगी बनना चाहते हैं तो अवश्य संपर्क करें। इस निमित्त आपको आपकी संस्था द्वारा होने वाले आयोजन में शताब्दी वर्ष का प्रतीक चिह्न अंकित करना होगा, अथवा शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कोई कार्यक्रम, प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह, विचार गोष्ठी, काव्य गोष्ठी, विद्यालयीन, महाविद्यालयीन कार्यक्रम इत्यादि रखने होंगे।
यदि आप भी सहभागिता कर शताब्दी वर्ष को गौरवशाली बनाने का ध्येय रखते हैं तो आपका स्वागत, वन्दन व अभिनन्दन है।
यदि आप सहयोगी/सहभागी होते हैं तो आपकी संस्था अथवा समूह का परिचय, प्रतीक चिह्न (लोगो) व आयोजन की जानकारी का देशव्यापी प्रचार-प्रसार मातृभाषा उन्नयन संस्थान के दल द्वारा किया जाएगा। आपकी सहभागिता को वेबसाइट, समाचार पत्रों, ख़बरों आदि में भी दर्शाया जाएगा। इस सहभागिता के लिए आपकी संस्था व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के सहभाग से आयोजन किए जायेंगे, जिसका खर्च तो आपकी संस्था स्थानीय स्तर पर वहन करेगी, किन्तु उसके राष्ट्रव्यापी प्रसार के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान आपका सहयोगी होगा।
तो क्या आप जुड़ना चाहेंगे हिन्दी कवि सम्मेलन शताब्दी महोत्सव से?
सहयोगी संस्थाओं को मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा सम्मानित भी किया जाएगा। शताब्दी वर्ष संबंधित रूपरेखा विस्तार से आपके साथ साझा की जाएगी, जिसमें से आपकी संस्था द्वारा यथायोग्य चयन कर गतिविधियाँ आपके क्षेत्र में आयोजित की जा सकती हैं।
आयोजनों में मातृभाषा उन्नयन संस्थान यथायोग्य सहयोग भी करेगा।
आइए मिलकर देशभर में मनाए जाने वाले शताब्दी वर्ष का हिस्सा बनें।

संपर्क करें-
डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
राष्ट्रीय अध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत

संपर्क- 09893877455
व्हाट्सएप्प- 9406653005
ईमेल- arpan455@gmail.com
वेब- www.arpanjain.com

केन्द्रीय कार्यालय- दिल्ली
अध्यक्षीय कार्यालय- इन्दौर, मध्यप्रदेश

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।