भारत देश महान

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मिलोगें तुम अगर देशके लोगों से

तो उनकी भावनाओं को समझोगे।

और देशके प्रति उनके भावों को

तुम निश्चित ही समझ पाओगें।

फिर देशप्रेम की ज्योत जलाओगें

और भारत को महान देश बनाओगें।

और इस कार्य में हम सभी अपनी

भूमिकाओं को निष्ठा से निभायेंगे।।

करना है देश के लिए कुछ तो

सबसे पहले खुदको जगाओं।

और अपना राष्ट्रप्रेम तुम दिखाओं

और देशवासीयों में राष्ट्रप्रेम जगाओ।

तभी भारत को विश्व में स्थापित

हमसब मिलकर कर पाएंगे।

और इसे महान देश पूरे विश्व से

हम लोग कहलवायेंगे।।

हमारा भारतदेश भावना प्रधान

कृषि प्रधान कर्म प्रधान हैं और।

न जाने कितने देवी देवताओं की

भारत जन्मभूमि और कर्मभूमि हैं।

तभी तो यहाँ के कण कण में

बसते है भक्त और भगवान।

जो स्वयं बना देते है भारत को

अपने आप में ही बहुत महान।

तभी तो पूरा विश्व अब कहता है की

भारत देश महान भारत देश महान।।

जय हिंद जय भारत

जय जिनेंद्र देव

संजय जैन “बीना” मुंबई

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।