स्थ्य मंत्रालय जनभाषा में नहीं, अंग्रेजी में देता सभी सूचनाएँ और ख़बर।

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विषय- भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अंग्रेजों के लिए काम करने व राजभाषा अधिनियम का शत्-प्रतिशत् उल्लंघन करने पर परिवाद।

महोदय,
कोविड काल में भारत सरकार आम जनता के लिए कई योजनाएँ बना रही है, अभियान चला रही है पर उनका लाभ आम नागरिकों तक बहुत कम पहुँच रहा है क्योंकि-

  1. कोरोना काल में स्वास्थ मंत्रालय द्वारा सभी योजनाएँ, इनके प्रपत्र, मोबाइल एप व वेबसाइट आदि केवल अंग्रेजी में बनाए जा रहे हैं।
    2, योजनाओं के नाम अंग्रेजी में रखे जा रहे हैं, केंद्र सरकार के अधिकारियों का अंग्रेजी दुराग्रह ही है यह जो आम जनता पिस रही है।
  2. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोरोना काल में राजभाषा अधिनियम का लगातार उल्लंघन किया गया है पर कोई सुनने वाला नहीं है। मैंने अप्रैल 2020 से अप्रैल 2021 तक लोक शिकायत पोर्टल, ईमेल व ट्विटर पर लगभग 100 शिकायतें कीं पर इस मंत्रालय के अधिकारियों ने एक भी शिकायत पर कार्यवाही नहीं की। अन्य नागरिकों ने भी सैकड़ों शिकायतें भेजी हैं, जिन पर मंत्रालय की ओर से कोई उत्तर 1 साल में भी नहीं दिया गया है।
  3. कोरोना बीमारी के संबंध में इस मंत्रालय ने एक भी आधिकारिक दस्तावेज राजभाषा में जारी नहीं किया है।
  4. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हिन्दी भाषी राज्यों को सभी पत्र, परिपत्र, कार्यालय ज्ञापन आदि केवल अंग्रेजी में जारी किए जा रहे हैं।
  5. कोरोना टीकाकरण का प्रमाण-पत्र नियम 11 का उल्लंघन करते हुए जारी किया जा रहा है।
  6. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पत्र सूचना कार्यालय को गत् 1 साल में एक भी विज्ञप्ति हिन्दी भाषा में जारी नहीं की है।
  7. टीकाकरण के लिए मोबाइल एप व वेबसाइट www.cowin.gov.in/केवल अंग्रेजी बनाए गए हैं, जिसके कारण देश के करोड़ों अंग्रेजी न जानने वाले इसका उपयोग करने से वंचित हैं और यह राष्ट्रपति जी के 2 जुलाई 2008 के आदेश का उल्लंघन है जिसमें साफ कहा गया है कि भारत सरकार की हर वेबसाइट राजभाषा हिन्दी में बनाई जाए।
  8. नियम 11 का उल्लंघन करते हुए मंत्रालय द्वारा सभी स्थायी बैनर, पोस्टर व मेज नामपट्ट केवल अंग्रेजी में तैयार करवाए गए हैं।
  9. कृपया यह भी जाँच करवाएँ कि गत् 1 साल से इस मंत्रालय के राजभाषा अधिकारियों से ऐसा क्या काम करवाया जा रहा है कि उनके होते हुए दस्तावेज राजभाषा में जारी नहीं किए जा रहे हैं?

इन सभी बातों से सिद्ध होता है कि भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय अंग्रेजों के लिए काम कर रहा है पर राष्ट्रवादी सरकार के होते हुए एक स्वयंप्रभु देश का मंत्रालय अंग्रेजों के लिए काम क्यों कर रहा है? आशा है आप हमारी असुविधा, परेशानी व कष्ट को समझेंगे।

आपसे अनुरोध है कि ऐसा मत होने दीजिए। यह सरासर भेदभाव है। हम अंग्रेजी न जानने वाले नागरिक कहाँ जाएँ, किससे गुहार लगाएँ?

भवदीय
अभिषेक कुमार

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।