किसम किसम के लोग

इन दो महीनो में जितना ‘वाट्सएप’ चलाया है, उतना कभी नहीं चलाया था। इससे प्राप्त ज्ञान व अनुभव के आधार पर कुछ नए किस्म के लोगों से परिचय हुआ, इन लोगों में वे शामिल नहीं हैं जो बिना नागा,तीसों दिन अलसुबह “गुड माॅर्निंग” शुभ प्रभात के किसी उपदेशात्मक संदेश को वाट्सएप पर भेजते हैं…! या वे लोग जो किसी मंदिर में स्थित मूर्ति के रोजाना दर्शन कराते हैं…! इसमें वे लोग भी शामिल नहीं हैं जो सिर्फ वाट्सएप पर मामेरे के कपड़ों की तरह आए हुए मेसेज को बगैर पढ़े बस “फारवर्ड” करते रहते हैं…ये लोग किसी के जन्मदिन, “मैरिज एनिवर्सरी” पुण्यतिथि पर भी एक शब्द कभी नहीं लिखते…सीधा किसी ओर के भेजे “मेसेज” को “काॅपीपेस्ट” कर इतिश्री कर लेते हैं…! ऐसे लोगों के बारे में पहले कई बार कहा जा चुका है…हम यहाँ चर्चा करेंगे कुछ अलहदा किस्म के इंसानो की, जो बहुतायत में हैं पर चर्चित नहीं हैं…लीजिए पेश है वाट्सएप शोध से उपजे इन किरदारों पर एक लघु शोध पत्र।

“फुसफुसे लोग” – ऐसे लोग वाट्सएप पर सार्वजनिक रूप से संबंधित समूह में अपनी बात कदापि नहीं कहते, परंतु उक्त समूह में आए किसी विषय पर निरंतर लोगों को (व्यक्तिगत तौर पर) किसी समारोह में, कहीं मिलने पर,उनके घर पहुंच कर या मोबाइल पर बात कर उकसाते रहते हैं। पहले तो इधर-उधर की बातें करते हैं फिर अपने लहजे को यथासंभव रहस्यमयी बनाकर उस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कानाफूसी करते हैं,और उम्मीद यह रखते हैं कि इस विषय पर आप उनके मुताबिक लिख कर वाट्सएप पर पोस्ट करें…इस प्रकार की कानाफूसात्मक बातें वें संबंधित ग्रुप से अपने हितैषी छाँट-छाँट कर निरंतर तब तक करते हैं जब तक कि वे अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो जाते…! इस प्रकार के लोग बेहद घातक किस्म के होते हैं,कृपया ऐसे लोगों के फुसलाने पर कदापि न फुसलें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

“भरभंड लोग”- इस किस्म के लोग आगा-पीछा सोचे बिना वाट्सएप पर आए किसी मेसेज पर तुरंत व व्यापक प्रतिक्रिया करते हैं। इनके मन में जो आता है, वह लिख देते हैं। मेसेज अच्छा लगता है तो तारीफों के पुल बांध देते हैं और बुरा लगने पर सामने वाले की बखिया उखड़ने से भी परहेज नहीं करते…और भूल जाते हैं…मन में कोई मैल नहीं रखते।
व्यक्तिगत तौर पर ऐसे लोगों को अच्छा मानने का मन करता तो है पर इनके “भरभंड पने” से डर भी लगता है…पता नहीं कब कौन सी बात इन्हे नहीं जमें और ये वाट्सएप ग्रुप पर अपनी लू उतार दे…!

“पनियल लोग”- इस प्रकार के लोग वाट्सएप ग्रुप पर आए किसी मेसेज या समूह चर्चा में पक्ष-विपक्ष के बारे में बहुत सोच विचार कर अपनी प्रतिक्रिया बेहद संतुलित व “अपरिणाम मूलक” ढंग से देते हैं। तात्पर्य यह कि “राम पढ़े तो राम की जय लगे और रावण पढ़े तो रावण की जय लगे…!” तात्पर्य यह कि जैसे पानी, मदिरा में भी घुल-मिल जाता है और दूध में भी, ठीक इसी प्रकार से इनकी लिखी बातें होती है, जिसे जो पढ़े, उसको अपने पक्ष में लिखी प्रतीत हो…अतः ऐसे लोगों का विश्वास करना, अपने ही हाथों अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा लगता है…!

किस्में तो ओर भी है पर उपरोक्त लिखी कुछ किस्मों के अलावा साहित्यकारों,कवियों,कलाकारों,ज्ञानियों,परम ज्ञानियों को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है। यह लघु शोध पत्र केवल साधारण मनुष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

कमलेश व्यास ‘कमल’
उज्जैन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।