उलझन

0 0
Read Time2 Minute, 25 Second

मन में उलझन
ज़हन में
विचारों का सैलाब
करवट लेते
तकिया सुधारते
गुज़री रात
आँखे कड़वाती
नींद कोसों दूर
ज़हन में
विचार का सैलाब
थमता नहीं
आख़िर ये हलचल
किस बात की
ये उलझन कैसी
क्या
अपने ही घर में
किसी अजनबी
की घुस पैठ की
आहट
जिसे अपनाया
ह्रदय में बसाया
उसका यूँ
हमारे प्रेम को
शक से देखना
बरकत और तरक्की के
लिए दिए तोफ़े
को यूँ ठुकराना
तुम्हारी एसी बेरुख़ी
छलनी कर गयी
मेरे कोमल मन को
कल कल बहते
झरने की मधुर ध्वनि
सहसा बदल गयी
सूखे रेगिस्तान की
सनसनाती गर्म हवाओं में
दुख तो इस बात का
की उसकी नासमझी
उसे हमसे इतनी दूर
कर रही है जहां से
हमारा वापस आना
शायद नामुमकिन हो
अपनों को अपने से
दूर होते देख ही
उपजी है
मन में उलझन
उमड़ा है
विचारों का सैलाब
उड़ गई है
आँखों की नीद
गुदगुदा तकिया भी
चुभ रहा है शूल सा
उसे बेख़ौफ़ सोता देख
पूछती हूँ ख़ुद से
क्यूँ सोती नहीं
जगती है रात भर
छोड़ अब ये जग भलाई
मौन रह कर
शांत मन से
सोच अपने आप की
मोड़ दे विचारों के
सैलाब का रुख़
कर वही बस
जो आह्लाद दे
आनंद दे
बस कर वही
जो मन भाए

डॉक्टर स्मिता मिश्रा, दिल्ली

परिचय

डॉक्टर स्मिता मिस्र
M.A B.ed ,M.B.A , Phd
सम्पादक प्रकाशक ज्ञान वाणी
प्रकाशन रचना संसार
आइ . पी . फ़ाउंडेशन – ट्रस्टी
ए. आइ . पी. एस्ट्रो – डायरेक्टर
बी कात्यायन पब्लिकेशन – डायरेक्टर
बबल बड प्राइवेट लिमिटेड – डायरेक्टर
एस्ट्रो ई शॉप – डायरेक्टर
एविस ट्रेडर – को पार्टनर
नव युवक दल- मार्ग दर्शक मंडल अध्यक्षता
फ़ाइव मरकेटर्स – डरेक्टर
डिस्कस इंडिया – चीफ़ एडिटर
रुचि – हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार , कविता कहानी लेखन , और पढ़ना ।

matruadmin

Next Post

केवल

Mon Jun 22 , 2020
क्या अभी भी सोचते हो मैं लिखूँ शृंगार केवल वक़्त है क्या ये अभी भी जो लिखूँ मैं प्यार केवल आज के हालात मुझको कर रहे मजबूर इतना छोड़ कर करुणा दया बस मैं लिखूँ अंगार केवल हर जगह क्यों लग रही हैं जिस्‍म की अब बोलियाँ यूँ लुट रहीं […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।