केवल

क्या अभी भी सोचते हो मैं लिखूँ शृंगार केवल
वक़्त है क्या ये अभी भी जो लिखूँ मैं प्यार केवल
आज के हालात मुझको कर रहे मजबूर इतना
छोड़ कर करुणा दया बस मैं लिखूँ अंगार केवल

हर जगह क्यों लग रही हैं जिस्‍म की अब बोलियाँ यूँ
लुट रहीं हैं आज भी क्यों दुलहिनों की डोलियाँ यूँ
अब बचा सकता नहीं जब बागबां भी फूल को तो
फायदा क्या फूल का अब तुम उगाओ खार केवल

अब भला किससे करें हम न्याय की भी आस बोलो
न्याय के ही देवता जब तोड़ दें विश्वास बोलो
नाचते हैं जीतने पर ज़ुर्म, धोखा, झूठ ही अब
और हिस्से में मिली है सत्य को तो हार केवल

इक तरफ तो थाल भर भर के सजे पकवान देखो
दूर रोटी से खड़े उस ओर के इंसान देखो
दो निवाले ही मयस्सर हो गए तो भी बहुत है
सेठ साहूकार के ही हैं यहाँ त्योहार केवल

ऋषभ जैन ‘प्रखर’, इंदौर

परिचय

नाम : ऋषभ जैन
साहित्यिक नाम : ऋषभ जैन ‘प्रखर’
पिता का नाम: श्री जीवन लाल जैन
माता का नाम : पुष्पा जैन
पता : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी सी ए
व्यवसाय : सॉफ्टवेयर डेवलपर
सहित्यिक: राष्ट्रीय सचिव कुंभ कलश साहित्य सेवा संस्थान (रजि.) प्रयागराज उ .प्र.
काव्य विधा: दोहा, मुक्तक, ग़ज़ल,गीत
काव्य संग्रह : साझा संकलन इक्कीसवीं सदी के चुनिंदा दोहे

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।