सत्य

0 0
Read Time29 Second

सत्य कभी न छोड़िये
परीक्षा कड़ी चाहे होए
सत्य मे है बड़ी शक्ति
जीत इसी की होए
सत्य है परमात्मा नाम
कल्याण इसी में होए
जो परमात्म पथ पर चले
कल्याण उसी का होए
सत्य एक वही पालनहार
ज्योतिबिन्दु रूप है उनका
शिव परमात्मा वही तो है
सर्वगुण स्वरूप है उनका।
#श्रीगोपाल नारसन

matruadmin

Next Post

मैं त्योहार मुझे पैसों से क्या?

Tue Dec 15 , 2020
मैं त्योहार मुझे पैसों से क्या? खुशियों से नाता रखता हूँ। बिन खुशियों के कभी-कभी, ढोंगी बन ढोंग दिखाता हूँ।। रिश्ता तो सभी धर्मों से है, रिश्तेदार महज़ बदले देखा। बिन प्यादे का लोटा बनकर, कइयों को ज्ञान बांटते देखा।। सच्चाई से दूर खड़ा, धर्मों में बंट रह जाता हूँ। […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।