मेरे संस्कार

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surendra
मेरे माता-पिता ने मुझे बस एक बात सिखाई है,
किसी का भला करो तो अपनी भी होती भलाई है।
में कभी फालतू की बातें नही करता यारों से,
यही बात मैंने अपने सभी यारों को भी सुनाई है।।

अक्सर बिगड़ जाते हैं बच्चे जवानी के मोड़ में,
मैंने कई बिगड़ों को ऊँगली पकड़कर सही राह दिखाई है।
गलतफहमियां अक्सर बिगाड़ देती है कई जिंदगियां,
मैंने उनकी ग़लतफ़हमी दूर कर कई जिंदगियां मिलाई है।।

मर्दो को खूबसूरत लड़कियों में महबूबा नज़र आती है,
मैंने बनाकर बहन उनको राखी से भरी अपनी कलाई है।
लाख खंजर मारे हैं लोगों ने अक्सर मेरे गले लगकर,
मैंने हर जख्म पर उन्हीं से प्यार की मरहम लगवाई है।।

जो जरुरत पड़ी अपनों को कभी अंधेरों में रोशनी की,
तो मैंने घर अपना जलाकर उन्हें रोशनी दिखाई है।
मैं खुलकर सामने कहता हूँ किसी की भी कमजोरियों को,
पीठ पीछे कमजोरियाँ कहना तो सबसे बड़ी बुराई है।।

खुश रखने की कोशिश करता हूँ मैं सदा दूसरों को,
अपनी ही कई खुशियां मैंने दिल में दबाई है।

                                                                  #सुरेन्द्र ठाकुर ‘अज्ञानी जी’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।