गुरुवर विद्यासागर एक मसीहा

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sonu
लुट गई है पूरी बस्ती,
बस मिट रही है हस्ती।
अब आया एक मसीहा,
आगम की उसमें मस्ती।।

बढ़ता ही जा रहा है,
सच को जिता रहा है।
जिनवर का है दीवाना,
राग-द्वेष नशा रहा है।।

अब है समझ में आया,
कुछ भी न मैंने पाया।
शिवमग मिला उसी को,
जिसने रत्नत्रय निभाया।।

रोतों को हँसा रहा है,
सोतों को जगा रहा है।
दस लक्षणों के बल से,
वो जीना सिखा रहा है।।

वैराग है जिसको भाया,
द्वादशांग उसने पढ़ाया।
उस मसीहा ने है सबको,
जीवन का अर्थ बताया।।

जबसे मैं जीने लगा हूँ,
दुखियों के सीने लगा हूँ।
प्रभु को निज में पाकर,
आनंद को पीने लगा हूँ।।

बरसों का ‘सोनू’ थका है,
देता आया खुद को दगा है।
आपको पाकर के ‘गुरुवर’,
लगता फिर सब नया है।।

                                                                        #सोनू कुमार जैन

परिचय : सोनू कुमार जैन उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले में सरकारी अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। यह सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहारान नामक स्थान के निवासी हैं। इन्होंने बीएससी के पश्चात बीएड,एमए (अंग्रेजी साहित्य)किया और अब हिन्दी साहित्य से एम.ए. कर रहे हैं। इन्हें मुक्तक,कविता एवं शायरी लिखने का शौक है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।