यंग इंडिया चेंज मेकर अवार्ड 2019 से नवाजे जाएंगे डा. स्वयंभू शलभ

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डा. स्वयंभू शलभ ‘यंग इंडिया चेंज मेकर अवार्ड 2019’ से नवाजे जाएंगे। यंग इंडिया फाउंडेशन द्वारा यह अवार्ड उन्हें  ‘कल्चरल एक्टिविज्म एवं सोशल रिफोर्मेशन’ हेतु प्रदान किया जाएगा।

इसकी घोषणा करते हुए यंग इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन विपुल शरण श्रीवास्तव ने कहा कि हमें गर्व है कि डा. शलभ सर जैसे व्यक्तित्व का सम्मान करने का अवसर प्राप्त होने वाला है। डा. शलभ की शख्सियत अपनेआप में एक संस्था के समान है।

डा. शलभ ने अपनी कलम को अपनी ताकत और सामाजिक सरोकार को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किये। स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय मसलों पर भी खुल कर अपनी बात रखी।
भारत नेपाल सीमा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए उन्होंने कई मुद्दे सरकार के सामने रखे जिन पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री सहित विभिन्न  मंत्रालयों ने संज्ञान लिया, संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाये।

हाल ही में पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘आइसटीज’ में उन्हें सम्मानित किया गया। इससे पूर्व साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें ग्वालियर में आयोजित ‘साहित्य साधना संसद’ में सम्मानित किया गया था। देश के शीर्षस्थ साहित्यकारों के सान्निध्य में रहे डा. शलभ ने साहित्य जगत में भी ऊँचा मुकाम हासिल किया है। उनकी पाँचवी किताब ‘कोई एक आशियाँ’ का विश्व स्तरीय प्रकाशन भी पिछले वर्ष अमेजॉन द्वारा किया गया। उनके व्यक्तित्व में विज्ञान और साहित्य का अद्भुत समन्वय है।

पूर्व में जगतगुरु वामाचार्य पुरस्कार, पीठाधीश पुरस्कार व दीर्घ सेवा पदक से सम्मानित डा. शलभ को अखिल भारतीय ब्याहुत महासभा, भूटान, कलवार कल्याण समिति, वीरगंज, अखिल भारतीय ब्याहुत कलवार महासभा, पटना, हरि खेतान बहुमुखी कैंपस, वीरगंज, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू, ठाकुर राम बहुमुखी कैंपस, प्राध्यापक संघ, वीरगंज समेत कई सामाजिक, शैक्षणिक व साहित्यिक संस्थाओं ने सम्मानित किया है।

श्री विपुल ने बताया कि डा. शलभ को यह अवार्ड पटना के सत्यम इंटरनेशनल में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा।
इस मौके पर अलग अलग क्षेत्र से चुने हुए उन विशिष्ट व्यक्तियों को भी सम्मानित किया जाएगा जो देश और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

#डॉ. स्वयंभू शलभ

परिचय : डॉ. स्वयंभू शलभ का निवास बिहार राज्य के रक्सौल शहर में हैl आपकी जन्मतिथि-२ नवम्बर १९६३ तथा जन्म स्थान-रक्सौल (बिहार)है l शिक्षा एमएससी(फिजिक्स) तथा पीएच-डी. है l कार्यक्षेत्र-प्राध्यापक (भौतिक विज्ञान) हैं l शहर-रक्सौल राज्य-बिहार है l सामाजिक क्षेत्र में भारत नेपाल के इस सीमा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कई मुद्दे सरकार के सामने रखे,जिन पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न मंत्रालयों ने संज्ञान लिया,संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाए हैं। आपकी विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,कहानी,लेख और संस्मरण है। ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं l ‘प्राणों के साज पर’, ‘अंतर्बोध’, ‘श्रृंखला के खंड’ (कविता संग्रह) एवं ‘अनुभूति दंश’ (गजल संग्रह) प्रकाशित तथा ‘डॉ.हरिवंशराय बच्चन के 38 पत्र डॉ. शलभ के नाम’ (पत्र संग्रह) एवं ‘कोई एक आशियां’ (कहानी संग्रह) प्रकाशनाधीन हैं l कुछ पत्रिकाओं का संपादन भी किया है l भूटान में अखिल भारतीय ब्याहुत महासभा के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विज्ञान और साहित्य की उपलब्धियों के लिए सम्मानित किए गए हैं। वार्षिक पत्रिका के प्रधान संपादक के रूप में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए दिसम्बर में जगतगुरु वामाचार्य‘पीठाधीश पुरस्कार’ और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अखिल भारतीय वियाहुत कलवार महासभा द्वारा भी सम्मानित किए गए हैं तो नेपाल में दीर्घ सेवा पदक से भी सम्मानित हुए हैं l साहित्य के प्रभाव से सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-जीवन का अध्ययन है। यह जिंदगी के दर्द,कड़वाहट और विषमताओं को समझने के साथ प्रेम,सौंदर्य और संवेदना है वहां तक पहुंचने का एक जरिया है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।