
ये बेचैनी,ये मायुसी आजीवन है
तेरे लिए आज भी दुखता मन है।
तुझे भूलना मेरे साहस मे नही है
नसो मे तेरे प्यार का चलन है।
दिल अब भी करता है तेरी जीद
पर तु किसी ओर की जानेमन है।
हां,एक बात पुछनी थी पर तुझसे
क्या सच मे शुकून देता धन है?
मर तो तेरी शादी के दिन ही गया हूं
बस खाक मे मिलना ये बदन है।
मेरी हालत पर तक्लिफ तुझे भी है
जुडा आज भी तेरा मुझसे मन है।
ईधर से ऊधर तक सबको पता है
संजय की चाहत किसी की दुल्हन है।
#संजय अश्क बालाघाटी

