हरित धरा हो सारी,
तरुण गिरि शृंगारी,
मीत गीत शीत संग,
झूमें पुरवाइया।
तरु खग वन्य जीव,
रट रहे पीव पीव,
तीज पर्व वृक्षों पर
झूलती कुमारियाँ।
आएँ मन भावन जो,
भाए मन सावन वो,
दूर होवे तब सब,
मन से दुस्वारिया।
खेत व फसल प्यारी,
वृक्ष रोपि मेड़ क्यारी,
नीर का प्रबंध कर
लाएँ खुशहालियाँ।
नाम– बाबू लाल शर्मा
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः
Mon Aug 5 , 2019
अच्छे बादल सच्चे लगते ! इधर उधर मतवारे उडते !! सूरज को ढकने फिर आते ! झुंड बना कर दौड़ लगाते !! आपस में देखो टकराते ! दाँत भींचते फिर लड़ जाते !! रिमझिम रिमझिम पानी बरसे ! बादल मन धरती पर तरसे !! आओ मिलकर साथी खेलें ! बादल […]