गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष चाहते है राहुल गांधी !

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gopal narsan
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस समय अपनी मजबूती के लिए वह हर उपाय तलाश रही है,जो कांग्रेस को उसका जनाधार लौटा सके।जिसके लिए स्वयं राहुल गांधी धीर गम्भीर होकर पार्टी नेताओं पर यह दबाव बना रहे है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद से उन्हें मुक्त कर किसी अन्य को यह जिम्मेदारी दी जाए।हालांकि ऐसा करने से कांग्रेस विरोधी उन ताकतों को बल मिलेगा जो अभी तक राहुल गांधी का मजाक उड़ाकर या फिर उन्हें कमजोर प्रचारित करके कांग्रेस की छवि खराब करने में जुटे हुए थे।लेकिन यह भी सच है कि कांग्रेस को हार के संकट से उभरने के लिए संगठन स्तर पर फेरबदल करके जमीनी कार्यकर्ताओ को आगे लाना होगा।शायद इसी लिए राहुल चाहते है कि अब गांधी परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को कांग्रेस की कमान सोंपी जाए।इसके लिए वे राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत से मिल चुके है।माना जा रहा है कि गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष बनाया गया तो अशोक गहलोत व हरीश रावत में से कोई एक चुना जा सकता है।चूंकि उक्त दोनों ही नेताओ की जमीनी स्तर पर संगठन के लिहाज से गहरी पकड़ है।राहुल गांधी उस कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष है जिसका भारत की आज़ादी में सबसे बड़ा हाथ रहा है. भारत की आज़ादी के बाद यह देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई थी।सन 1885 में अस्तित्व में आई कांग्रेस की स्थापना को 134 वर्ष हो चुके है।
आज़ादी के बाद 1952 में हुए चुनाव के साथ केंद्र की सत्ता में आई कांग्रेस का सन 1977 तक देश पर एकछत्र शासन था. शुरुआती 25 सालों में कांग्रेस के  सामने टक्टर में कोई बड़ी विपक्षी पार्टी भी नहीं थी.
लेकिन जब छठी लोकसभा के लिए 1977 में चुनाव हुए तो जनता पार्टी ने कांग्रेस की कुर्सी छीन ली. हालांकि तीन साल के अंदर ही सन 1980 में कांग्रेस की वापसी हो गई  थी,लेकिन 1989 में कांग्रेस को फिर हार का सामना करना पड़ा था। 11 महीनों तक भारतीय जनता पार्टी और वामदलों के समर्थन से वीपी सिंह प्रधानमंत्री रहे लेकिन बाद में कांग्रेस के समर्थन से छह महीनों से कुछ अधिक अवधि के लिए चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे।
सन 1980 में एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में लौटी ।कांग्रेस छह महीने को छोड़ 1996 तक केंद्र में बनी रही. इसके बाद 2004 से 2014 तक लगातार दो बार कांग्रेस एक बार फिर केंद्र की सत्ता में धमक के साथ बनी रही।
जबकि 1991, 2004 और 2009 में कांग्रेस ने सफलता पूर्वक केंद्र में गठबंधन की सरकार का नेतृत्व किया.
1952 से 2019 तक देश में 17 बार आम चुनाव हुए हैं जिसमे कांग्रेस पार्टी ने अब तक सात बार पूर्ण बहुमत तो चार बार गठबंधन के साथ केंद्र सरकार का हिस्सा रही है. कांग्रेस ने भारत को सात प्रधानमंत्री (जवाहरलाल नेहरू, गुलज़ारीलाल नंदा, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिंहा राव और मनमोहन सिंह) दिये हैं और 50 वर्षों से अधिक केंद्र की सत्ता का नेतृत्व किया है.
आज़ादी से पहले कांग्रेस के अध्यक्ष का कार्यकाल एक साल के  हुआ करता था. सन1885 में डब्ल्यू सी बनर्जी से लेकर आज़ादी के वक़्त जेपी कृपलानी और 1950 में पुरुषोत्तम दास टंडन तक कांग्रेस ने 60 बार अपने अध्यक्ष चुने.
देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के पिता मोती लाल नेहरू सन 1928 में कांग्रेस अध्यक्ष चुने गये तो आज़ादी से पहले जवाहर लाल नेहरू चार बार (1929, 1930, 1936, 1937) कांग्रेस के अध्यक्ष रहे.
आज़ादी के बाद के अधिकांश वर्षों में कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर नेहरू-गांधी परिवार का ही राज रहा है. सन1951-52 से लेकर 1954 तक नेहरू फिर 1959 में इंदिरा गांधी. इंदिरा गांधी ही फिर 1978 से 1984 तक अध्यक्ष रहीं. उनकी मौत के बाद 1985 से 1991 तक राजीव गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने। हालांकि सबसे लंबे समय तक देश की इस सबसे पुरानी पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी रही हैं. वो 1998 से 2017 तक क़रीब 20 वर्षों तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं और उनके बाद से अब तक राहुल गांधी पार्टी की कमान संभाल रहे हैं.
सन 1928 में मोती लाल नेहरू के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के साथ ही नेहरू-गांधी परिवार का इस पार्टी के अध्यक्ष पद से नाता जुड़ा जो आज तक बदस्तूर जारी है.
आज़ादी के बाद से अब तक कांग्रेस के 29 अध्यक्ष रहे हैं. इन 72 वर्षों में 37 वर्ष नेहरू-गांधी परिवार के तो 35 वर्ष ग़ैर कांग्रेसी अध्यक्ष रहे हैं.लेकिन अब फिर राहुल गांधी की अध्यक्ष बदलने की जिद के चलते गाँधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने की हवा जोर पकड़ रही है।जिसमे से तैरकर कभी अशोक गहलोत तो कभी हरीश रावत का नाम सामने आ रहा है।सच क्या है राम ही जाने
#श्रीगोपाल नारसन
परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा भारत गौरव

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।