दादी जानकी को भेंट किया गुस्से का साफ्टवेयर

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विश्व शांति की दूत व प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य प्रशासिका 103 वर्षीय राजयोगिनी दादी जानकी को गुस्से का साफ्टवेयर और आपरेटिंग सिस्टम नामक पुस्तक भेंट की गई।माउंट आबू में ब्रम्हाकुमारी संस्थान के मीडिया प्रभागद्वारा आयोजित राष्ट्रीय  मीडिया कांफ्रेंस में बतौर स्पीकर भाग लेने गए  श्रीगोपाल नारसन ने  शान्ति वन में
डॉ शिप्रा मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक गुस्से का सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में दादी जानकी को बताया  ओर पुस्तक के लेखक डॉ शिप्रा मिश्रा व मनोज श्रीवास्तव का परिचय दादी जानकी से कराया।उनके द्वारा ब्रम्हाकुमारी चीफ दादी जानकी को  यह पुस्तक भेंट की गई।उत्तराखंड सूचना विभाग के सहायक निदेशक एवं पुस्तक लेखक मनोज श्रीवास्तव ने पुस्तक की विषयवस्तु के बारे में बताया कि
क्रोध हमारे कार्य क्षमता को कम करता है और सम्बन्धों को प्रभावित करता है। क्रोध के स्थान पर शान्ति से कार्य लेना बेहतर विकल्प है। इस सन्दर्भ में यह पुस्तक विशेष प्रासंगिकता रखती है। यह पुस्तक सभी आयु एवं वर्ग के लिए उपयोगी है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक विचार छोड़ कर सकारात्मक विचार अपनाने पर गुस्से से बचा जा सकता है।
पुस्तक में क्रोध के अन्य विकल्पों को तलाशने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में क्रोध की समाजशास्त्रीय, मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्साशास्त्रीय व्याख्या, दार्शनिक आधार पर की गई है। क्रोध की समस्या से बचने के लिए हमें क्रोध के साफ्टवेयर और आपरेटिंग सिस्टम में बदलाव लाना होगा। हमारा बिलीफ सिस्टम, कम्प्यूटर के आपरेटिंग सिस्टम के समान है। इसमें डाली गई सूचनायें और साफ्टवेयर, कम्प्यूटर में डाले गये आपरेटिंग की सहायता से कार्य करेगी। इस अवसर पर दादी जानकी के साथ हंसा दीदी व शीलू दीदी भी मौजूद रही।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।