देश के सैनिको के प्रति सोच  

sanjay
दोस्तों आज हमारा देश जिस दौर से गुजर रहा है उस सब के जिम्मेदार भी हम सभी लोग है / यदि समय रहते पहले से ही हम और आप शतर्क हो जाते तो शायद हमें आज ये दिन देखने को नहीं मिलते / पहले तो  हम लोग सस्ते समाने समझ कर बहुत खरीदारी करते रहे और अब एक दम से बदन करने को आ रहे है / इस बात हमें पहले भी पता थी की चीन  हमेशा ही भारत विरोधी रहा है औए पकिस्तान की कभी सीधी तो कभी दूसरो के द्वारा उसका सर्पोट करता रहा है / जब पानी आज सर के ऊपर से बहाने लगा तब हम लोग जग रहे है / यदि बनियाई बुध्दि से हम उसके पर कतारे तो दोनों ही काम बड़ी आसानी के साथ हो जायेगे / की साँप का साँप मर जाए और हमारी लाठी भी न टूटे / किसी को भी यदि कमजोर करना हो तो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी पर हमें बार करना चाहिए / और वैसे ही आज कल चीन की वित्तीय स्थिति सही नहीं है / चीन की कुल पूजी में भारत का ३५-४०% योगदान है / यदि हम उस के सामान आदि का बहिष्कार करना प्रारम्भ कर दे तो , वो दिन दूर नहीं की चीन को भारत के सामने झुकना पड़ेगा / यही हाल अमेरिका का भी है ? विश्व में सबसे ज्यादा खुदरा व्यापारी सिर्फ हिंदुस्तान में ही है / हम चीन को सिर्फ १०-१२% ही निर्यात करते है और चीन हमें कितना निर्यात करता है / ये बात सोचने योग है ? हमारे ही पैसे से हमें ही हानि पहुँचा रहा है / अब सभी देशवासियो को सच्चाई का पता चल गया है तो हमें प्रतिज्ञा करना चाहिए की हम स्वदेशी वस्तु ही आज से खरीदेंगे / ताकि देश का पैसा देश में ही रहेगा / वैसे भी चीन को हिंदुस्तान में उसके सामान की उपेक्षा हजम नहीं हो रही है। इसलिए बेख़ौलाहट में कुछ भी बाके जा रहा है / बोला रहा है की उसे हमारे सामानों को निश्चित ही खरीदना पड़ेगा / अब हम सब भारतीयों का परम कर्तव्य बनाता है, की हम वो करके दिखाए जी जापान ने अमेरिका को दिन दिखा दिए थे / आप सभी लोगो को पता होगा की किसी को भी यदि तोडना है तो सबसे पहले उसे  देश की वित्तीय  स्थिति को इतना ज्यादा कमजोर कर दो , की भविष्य में हिंदुस्तान के सामने सिर न उठा सके / इसके लिए देश की जनता को बहुत बड़ी चौनोती, चीन जैसे देशो के सामने उत्पन्न कर देना चाहिए , वो भी कैसे , उसका सामान का बहिष्कार करके / दो पैसे अपने ही देश के  निर्माताओ को दो भले ही वो चीन की कीमत से थोड़ा ज्यादा ही क्यों न हो / यदि हम १२० करोड़ लोग एक मत से ठान ले, अच्छे से अच्छे देश की नींव को हिलाकर रखा सकते है / तो इस बार हम सभी भारतीय एक शपथ लेते है की जो भी देश हिंदुस्तान के खिलाप जहर उगल रहा है और आतकंवादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए दूसरो की मदद कर रहा है / उस देश का और उस देश से आने वाले सभी वस्तुओ  का विरोध करे और उनके सामान का बहिष्कार करे / देश के व्यापारियों से भी अनुरोध है की वो भी देश हिट में उचित कदम उठाये और भारत की स्वंत्रता को आगे भी बनाये रखे / ताकि हमारे देश भक्तो की कुर्बानियां  बेकार न जाये / स्वदेशी वस्तुओ को अपनाये और अपने देश भक्त होने का परिचय दे / जो शहीद हुए है उनकी वीरता को में  सिर झुककर सलूट करता हूँ / हमारे देश के सैनिको के लिए दीपावली की शुभ कामनाये /

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

 

matruadmin

Next Post

संस्कार

Tue Jul 3 , 2018
बच्चियो पर अत्याचार हो रहे हम शर्मशार वहशी दरिंदो की भरमार नही मिल रहा ठोस उपचार संस्कार विहीन समाज है न शर्म है ना लाज है कानून व्यवस्था लचर है अपराधियो का असर है पीडितो की सुनवाई नही खाते डांट फ़क़त है सुरक्षा दो ,बेटी बचेगी संरक्षण दो ,बेटी पढ़ेगी। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।