पहले खुद सुधरे

niraj tyagi
अंकुर बड़ी तेजी से अपने घर की तरफ अपनी कार को दौड़ाता हुआ जा रहा था पता नहीं उसके मोबाइल पर घर से क्या खबर आई और वह अचानक अपने ऑफिस से निकला और घर पहुंचने की जल्दी में कार को तेजी से दौड़ाया।
        घर पहुंचकर अपने पिता को अस्पताल की और तेजी से ले चला।पूरे रास्ते अपनी माँ और पिता से लड़ता रहा। मम्मी मैं पापा को कितने समय से समझा रहा हूँ कि सिगरेट और शराब छोड़ दे लेकिन ये मानते ही नही, सारा काम-धाम डिस्टर्ब हो जाता है।
         हॉस्पिटल पहुंचकर अंकुर के पिता के सारे टेस्ट हुए और टेस्टों के बाद पाया गया कि उन्हें अब बाईपास सर्जरी की जरूरत है।अंकुर इस बात से बहुत परेशान था।घर का इकलौता बेटा होने के कारण अब पिता की देखरेख के लिए उसे हॉस्पिटल में रुकना पड़ेगा।
         जिसकी वजह से उसका काम में काफी ज्यादा दिक्कत आएगी।पिता का बाईपास कराने के बाद डॉक्टर उन्हें आईसीयू में ले गए।अंकुर के पिता अब ठीक है।शाम को जब अंकुर के ऑफिस के मित्र उससे मिलने के लिए आए तो अंकुर उन्हें लेकर बाहर आया और बोला यार बहुत ही परेशान महसूस कर रहा हूं आओ चलो कहीं चल कर ड्रिंक लेते हैं।
        अंकुर के ऑफिस के साथियों में से एक साथी बोला यार तुम किस मुँह से अपने पिता को समझाते हो।जिस काम के लिए तुम उन्हें मना करते हो रोज शाम को उसी काम को खुद करने बैठ जाते हो।अंकुर अपने मित्र की यह बात सुनकर स्तब्ध रह गया और उसके पास कोई भी जवाब नहीं बना।
#नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश )

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