विछोह की पीड़ा

Saurabh thakur
पता नही किस शहर में,
किस गली तुम चली गई।
मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई ।
पता नही हम किस मोड़ पर
फिर कभी मिल पाएँगे ।
इस अनूठी दुनिया में फिर
किस तरह से संभल पाएँगे ।
पता नही तेरे बिन हम,
जी पाएँगे या मर जाएँगे ।
हम बिछड़ गए उस दिन,जिस दिन
तुम मुझसे मिलने वाली थी
मै तुमसे मिलने वाला था ।
इस अंधी दुनिया ने कभी
हमको समझा ही नही ।
काश समझ पाती दुनिया,
तो हम कभी बिछड़ते ही नही ।
प्यार करते थे हम तुमसे,
पर कभी कह ही न पाएँ ।
आज भी सोचता हूँ की,
काश वो दिन वापस लौट आए ।
बहुत समय लगा दिया हमने इजहार में ।
कब तक भटकेंगे हम तेरे इन्तजार में ।
हम बिछड़ गए थे उस दिन,जिस दिन,
तुम मुझसे मिलने वाली थी,
मै तुमसे मिलने मिलने वाला था ।

सौरभ कुमार ठाकुर 

बाल कवि और लेखक

मुजफ्फरपुर(बिहार)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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