
जब वतन पर ग़ज़ल सुनाई है।
दाद हमने भी खूब पाई है।।
लोग मुझको ग़रीब कहते हैं
दिल की दौलत मगर लुटाई है।
हम पे कुछ तो भरोसा कर देखो,
जिंदगी तुम पे ही लुटाई है।
कोई दिल को चुरा नहीं सकता,
क्यों मुहब्बत मेरी चुराई है।
अब मुलाकात मुझसे कर भी लो,
हर गली फूलों से सजाई है।
प्यार करते हैं यूँ जमाने से
घर में लड़ते हैं वो तो भाई है ।
लाख नफ़रत करे ज़माना पर
“राज” करता न बेवफ़ाई है ।
#कृष्ण कुमार सैनी”राज”,दौसा,राजस्थान

