ज़रा सम्हाल के……

saket jain

हम सबमें जज़्बात होते हैं………

हम सबके जज़्बात होते हैं……..

………. होने भी चाहिए क्योंकि यदि जज़्बात न हों तो फिर मानव और मशीन में फर्क ही नहीं रह जायेगा इसलिए जज़्बातों का होना तो बनता है, स्वाभाविक भी है ।

हां पर हमें जज़्बातों में ज़्यादा बहना नहीं चाहिए क्योंकि कहा है न, कि यदि हम जज़्बातों में बह जाएंगे तो वे जज़्बात हमारे लिए स्टेटस बनकर रह जाएंगे और दूसरों के लिए एन्टरटेनमेन्ट ।

अतः मेरा तो यही मानना है कि जज़्बात मतलब कि हमारा दिल व उसकी भावनाएं और जज़्बातों पर काबू रखने वाले अपने दिमाग इन दोनों का बहुत संतुलन होना चाहिए ।

आजकल यदि लोगों के जज़्बातों को देखें तो वे और भी स्वार्थपूर्ण हो गये हैं, यही कारण है कि वे अपने जज़्बातों की कद्र तो चाहते है पर इसके चक्कर में वे कभी-कभी उनके जज़्बातों की भी कद्र नहीं कर पाते जो उन्हें इस दुनिया में लाए, जिन्होंने उन्हें दुनिया में हर कदम पर सम्हाला ।

और इसलिए गहराई से विचार करें कि यह स्वार्थपरता उनके पतन का ही कारण बनती है, उत्थान का नहीं ।

लेकिन यदि हम अपने साथ-साथ अन्यों के जज़्बातों की भी कद्र करने लग जायें तो यकीन मानिये ये समाज अपने आप ही तरक्की की नई ऊँचाईयों को छू लेगा ।

इस प्रसंग में हम और आप कहां खड़े है यह विचार करना आवश्यक है ? हम और आप समाज की इस तरक्की में अपना भरपूर योगदान दें यही मंगल भावना है ।

साकेत जैन शास्त्री ‘सहज’
जयपुर(राजस्थान)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।