हिंदी प्रचार प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका

ajit prajapati
आज के इस युग में हिन्दी का सोशल मीडिया प्रचार में अहम योगदान है,आज सोशल मीडिया के सहारे हिंदी का बहुमुखी विकास हो रहा है. सोशल मीडिया आज आदमी को पूरी दुनिया से जोड़ते हैं, तो यह हिन्दी भाषा के माध्यम से ही संभव है. देसी ही नहीं, विदेशी चैनलों पर भी हिन्दी अपने सामथ्र्य को व्यक्त कर रही हैं. यह सोशल मीडिया  की जनभाषा का रूप धारण कर अपनी व्यापकता प्रदर्शित कर रही है. पौराणिक, ऐतिहासिक, पारिवारिक, जासूसी, वैज्ञानिक और हास्य-व्यंग्य विभिन्न प्रकार के धारावाहिकों की भाषा बिल्कुल सरल और व्यावहारिक होने के कारण सहज जन-स्वीकृत हो रही है.  सोशल मीडिया हिन्दी को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. हिन्दी विज्ञापनों का आधिपत्य बढ़ता जा रहा है. भारत में सबसे बड़ा उपभोक्ता वर्ग मध्यम और कमजोर तबके का है, जिसकी भाषा हिन्दी है. रेडियो का भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार में योगदान रहा, लेकिन टेलीविजन के मुकाबले कुछ कम रहा. फिल्मों से हिन्दी को विश्वस्तरीय पहचान मिली है. हिन्दी भाषा ऑस्कर तक पहुंची. मोबाइल और कंप्यूटर में भी हिन्दी विकल्प भी इस भाषा को समृद्ध और पुष्ट बना रही है. इसी प्रकार वेबसाइट और इंटरनेट की सुविधा ने ई-संस्करण तथा पूर्णत: ऑनलाइन पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराके हिन्दी को विस्तारशील बना दिया है. आज सोशल मीडिया के चलते ही विश्व के कोई कोने में बैठा इंसान हिन्दी से रूबरू हो सकता है. हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है।
अजीत सिंह प्रजापति
अटेली (हरियाणा)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।