किताबें

sandeep kumar
किताबें!
किताबें ज्ञान का भंडार होती हैं
किताबों में छीपे रहते हैं
अनगिनत अल्फाज,
किताबें अज्ञानता को दूर करती हैं
जरा इनसे मित्रता तो करो,
किताबें बहुत कुछ देती हैं।
किताबें!
किताबें  समुद्र जैसी होती हैं
इनमें समाहित होते हैं
बहुमूल्य रत्न
किताबें दूर कर देती हैं
समस्त समस्याओं को
जरा इनसे मित्रता तो करो
किताबें बहुत कुछ देती हैं
किताबें!
किताबें फूलों की बगिया हैं
इस बगिया का प्रत्येक फूल
गुणकारी होता है
कभी न देंगी दगा
साथ निभाएँगी सदा
जरा इनसे मित्रता तो करो
किताबें बहुत कुछ देती हैं।
किताबें!
किताबें बेजुबान होती हैं
मगर शब्दों में जुबां होती है
ये कह जाती हैं अकल्पनीय बातें
जरा इनसे मित्रता तो करो
किताबें बहुत कुछ देती हैं
किताबें!
किताबें माँ होती हैं।
जिस तरह माँ को शब्दों द्वारा वर्णित करना असंभव है,
किताबें संतान के लिए समर्पित होकर ज्ञान का वरदान देती है, जरा इनसे मित्रता तो करो,
किताबें बहुत कुछ देती हैं।
#कुमार संदीप
परिचय:–
नाम-संदीप कुमार मिश्रा
साहित्यक नाम-कुमार संदीप
लेखन विधा-कविता
शहर-मुजफ्फरपुर(बिहार)
गाँव-सिमरा
साहित्यक उपलब्धि:-प्रसिद्ध समाचारपत्र-मेरठ से प्रकाशित विजय दर्पण में मेरी रचना को स्थान मिल चुका है
प्रसिद्ध समाचारपत्र हरियाणा प्रदीप में मेरी रचना को स्थान मिल चुका है।
राज्स्थान से प्रकाशित प्रसिद्ध समाचारपत्र युगपक्ष में प्रकाशित हुआ है।
गाजियाबाद से प्रकाशित दैनिक वर्तमान अंकुर में भी रचना प्रकाशित हुई है,एवं अन्य समाचारपत्र में मेरी रचना आई है।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।