जब से मिली है नजरे ।
बेहाल हो रहा हूँ।
तुम से मोहब्बत करने ।
कब से तड़प रहा हूँ।।
कोई तो हमे बताये ।
कहाँ वो चले गए है ।
रातो की नींद चुराकर।
खुद चैन से सो रहे है।।
ये कम बख्त मोहब्बत ।
क्या क्या हमें दिखाए ।
खुद चैन से रहे वो ।
हमे क्यो रोज रुलाये ।।
करना है अगर मोहब्बत ।
तो आजा आज मिलने ।
वार्ना मेरे दिल से ।
क्यो खेल रहे थे अब तक।।
जो गैर से करोगे ।
अब आगे तुम मोहब्बत ।
खुद चैन से तुम भी ।
कभी रह नही पाओगे ।।
जब से मिली है नजरें ।
बेहाल हो रहा हूँ ।।
#संजय जैन
परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।
Wed Mar 13 , 2019
प्रभु का जिसे भजन है करना। मन को सदा सरल ही रखना। हर भारतीय जन है अपने। अब सिद्ध होय सब के सपने। जननी धरा वतन नाज करें। हम मानवीय परिताप हरे। अरमान वीर बलिदान करे। भगवान धीर मम मान धरे। रथवान कृष्ण जब गीत कहे। मन मान पार्थ तब […]