महिला सशक्तिकरण की पहल अपने ही घर से हो

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वर्तमान समय में यह सच है कि नारी अपनी पूरी शक्ति के साथ चहुँ ओर विकास कर रही है ।आज वह अपने आत्मविश्वास के बल पर समाज में अपनी पहचान बनाने में सक्षम हुई है।
नारी को हर परिवार की धुरी माना जाता है फिर भी आज जिधर देखो उधर नारी सशक्तिकरण की आवाज़ और मुद्दों पर विचार किया जाता है, आवाज उठाई जाती है कि हर क्षेत्र में महिला को और अधिक सशक्त बनाया जाए जिससे कि समाज भी उन्नति करें ।
महिलाओ के अधिकार हेतु सरकार द्वारा विभिन्न प्रयास किये जा रहे है, एवं महिलाएं भी अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है. परन्तु इस सबके वाबजूद स्थिति विपरीत बनी हुई है, महिलाओ के प्रति अपराधों में लगातार इजाफा हुआ है.
  महिलाओं के साथ जो शोषण,अमानवीय यातनाएं,दुराचार, तेजाब फेंकना अन्य तरह के मामले महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो प्रयास किया जा रहे हैं उन पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं।
 ऐसे समय में आवश्यकता है कि हम महिला सशक्तिकरण शुरू करने की मुहिम अपने परिवार से करें ।अपने बच्चों को महिला की इज्जत करना शुरु से ही सिखाए। हमें उनको सिखाने के लिए स्वयं आदर्श बनना होगा।  मां ,पत्नी, बहिन, और घर में मौजूद महिला को आदर के साथ बोले। महिलाओं को हम आगे लाएं, बेटियों को पढ़ाए और उदाहरण के रूप में वास्तव में महिला सशक्तिकरण की बात करें हर घर से महिला सशक्तिकरण का उदाहरण मुहिम की तरह हो फिर देखिए सशक्त महिला आप के घर की पहचान बनेगी,घर की शान बनेगी, देश की पहचान बनेगी, और सशक्त देश सामने आएगा।
#रेनू शर्मा*शब्द मुखर*
जयपुर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।