पिता

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babulal sharma
सजीवन  प्राण देता है, सहारा  गेह का होते।
कहें कैसे विधाता है,पिताजी कम नहीं होते।
💫
मिले बल ताप ऊर्जा भी,
.                     सृजन पोषण सभी करता।
नहीं बातें दिवाकर की,
.                      पिता भी कम नही तपता।
💫
मिले चहुँओर से रक्षा,करे हिम ताप से छाया।
नहीं आकाश की बातें,पिताजी में यहीं माया।
💫
करे अपनी सदा रक्षा,वही तो शत्रु के भय से।
नहीं बातें हिमालय की,पिता मेरे हिमालय से
💫
बसेरा  सर्व जन देता, स्वयं साधू बना रहता।
नहीं देखे कहीं पौधे,पिता बरगद बने सहता।
💫
करे तन जीर्ण खारा जो,
.                    सु दानी कर्ण  सा मानो।
मरण की बात आए तो,
.                    पिता दशरथ मरे जानो।
💫
जगूँ जो भोर में जल्दी, मुझे पूरव दिखे प्यारे।
पिता ही जागते पहले,कहे क्यों भोर के तारे।
💫
कभी बाधा हमे आए,
.                  उसी  से राह दिखती है।
नही ध्रुव की कहूँ बातें,
.                 पिता की राय मिलती है।
💫
कहें वो यों नही रोता, रुदन भारी नहीं रहता?
रिसे नगराज से झरने,पिता का नेत्र है झरता।
💫
नदी की धार बहती है,हिमालय श्वेद की धारा,
पिता के श्वेद बूंदो से,नहीं ,सागर कहीं खारा।
💫
झरे ज्यों नीर पर्वत से,
.                   सुता कर,पीत जब करने।
कभी आँखें मिलाओ तो,
.                    पिता  के  नेत्र  हों  झरने।
💫
महा जो नीर खारा है,
.                   पिता का श्वेद खारा है।
समन्दर है बड़े लेकिन,
.                  पिता कब धीर हारा है।
💫
कहें गोदान का हीरो, अभावो का दुलारा है।
दिखाई दे वही  होरी, पिता भी तो हमारा है।
💫
पिता में भावना जागे,कहें हदपार कर जाता,
अँधेरीे रात यमुना में,पिता वसुदेव ही आता।
💫
सजीवी जाति प्राकृत से,अजूबे,मोह है पाता।
भले मौके कहीं पाए, वही  धृतराष्ट्र हो जाता।
💫
निराली मोह की बातें,पिता जो पूत पर लाते।
सुने सुत घात,जो देखो,गुरू वे द्रोण कट जाते
💫
पिता सोचे सभी ऐसे,सुतों की पीर पी जाए।
हुमायू रुग्ण हो लेकिन, मरे बाबर वहीं पाए।
💫
अहं खण्डर कँगूरों कर,
.                    इमारत नींव कहलाता।
कभी जो खुद इमारत था,
.                   पिता दीवार बन जाता।
💫
विजेताई तमन्ना है, पुरुष के खून में हर दम।
भरे सुत में सदा ताकत,पिता हारेअहं बेगम।
💫
न देवो से डरा  यारों, सदा रिपु से रहे भारा।
मगर हो पूत बेदम तो, पिता संतान से हारा।
💫
रखें हसरत जमाने में,महल रुतबे बनाने का।
पिता अरमान पालेंगे,विरासत छोड़ जानेका।
💫
पिता ने ले लिया भी तो,बड़े वरदान दे जाता,
ययाती भीष्म की बातें,जमाने,याद है आता।
💫
नरेशों की रही फितरत,लड़ाई घात की बातें।
सुतों हित राजतज देते,चले वनवास में जाते।
💫
उसे नाराज मत करना,वही तो भव नियंता है,
सितारे टूट से जाते, पिता जब क्रुद्ध होता है।
💫
पिता की पीठ वे काँधे,बड़े ही दम दिखाते हैं।
जनाजा पूत  का ढोतेे, पिता दम टूट जाते है।
💫
बड़ा सीना, गरम तेवर, गरूरे दम  बने रहते।
विदा बेटी कभी होती,पिघल धोरे वही बहते।
💫
बने माँ की वही महिमा, सुहाने गीत की बाते।
हिना की शक्ति बिंदी के,पिताजी स्रोत है पाते
💫
मिले शौहरत रुतबे ये,बने दौलत सभी बाते।
रखे वे धीरगुण सारे, पिता भी मातु से पाते।
💫
दिए जो अस्थियाँ दानी,
.                    दधीची नाम,था ऋषि का।
स्वर्ग के देवताओं पर,
.                   महा अहसान था जिसका।
💫
मगर सर्वस्व जो दे ते ,कऱें सम्मान उनका भी।
पिता ऐसा तपी होता,रहेअहसास इसका भी।
💫
विधाता छंद में देखें,सभी बाते पिता पद की।
न शर्मा लाल बाबू तू,अमानत है विरासत की।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।