अश्क

navnita katakvar

अल्फाजो को बेअसर कर जाते है,
शिद्दत मैं बहे अश्क।
दर्द की इंतहा को
बया कर जाते है।

दिलो के बोझ मन की घुटन,
दास्तान ना जाने कितनी,
जमाने से छुपाकर अपने साथ बहा ले जाते है।
अल्फाजो को बेअसर कर जाते है,
शिद्दत मैं बहे अश्क।
दर्द की इंतहा को
बया कर जाते है।

बेरंग है ये ना निशानी अपनी छोड़ जाते है।
बड़े हमदर्द है ये,
आंखो में अपना घर बनाते है।
अथह समुन्दर है इनका,
ना जाने कैसे समझ जाते है।
जज्बातों की महफ़िल मैं
बिन बुलाये चले आते है।
अल्फाजो को बेअसर कर जाते है,
शिद्दत मैं बहे अश्क,
दर्द की इंतहा को
बया कर जाते है।

पुर्ण नाम -नवनीता कटकवार
साहित्यक उपनाम-नवनीता की ✍से
जन्म तिथि -19:6:79
वर्तमान पता – सी.सराेजनी विला
पंडित दीनदयालपुरम कालाेनी
MIG2 सिविल लाइन
राज्य -मध्यप्रदेश
शहर – बालाघाट
शिक्षा- M .कॉम
कार्यक्षेत्र -लेखन
विधा- कहानी, कविता, लेख, लघु कथा, संस्मरण, इत्यादि
प्रकाशन -अन्तरा शब्द शक्ति
सम्मान -मातृभाषा उन्ननयन सम्मान
ब्लॉग -नवनीता की ✍से
अन्य उपलब्थिया —
लेखन का उद्देश्य -लेखन में अधिक रुचि और सामाजिक जागरूकता में योगदान के लिए

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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