अर्जी एक दर्दभरी

sita gupta
खगवृदों के सभापति से,
नन्हीं चिड़िया मिलने आई |
अश्रुपूरित नयन थे उसके,
चोंच में अपनी “अर्जी” लाई|
मदद करो तुम भाई मेरे,
मेरी जान पर आफत आई|
बच्चे मेरे कहाँ खो गए,
जिनको दुनिया में थी लाई|
दाना लेने मैं गई थी,
छोड़ आँख के तारों को |
नींद मैंने हँसते देखा,
अपने राजकुमारों को ||
नहीं डाल है अभी वहाँ पर,
न ही मेरे बच्चे हैं |
उड़ भी न पाए होंगें  वो!
तीनों तो अभी बच्चे हैं |
कहाँ ढूँड़ूँ मैं आँख के तारे,
इतने बड़े संसार में |
किसको जाकर “अर्जी “दूँ मैं,
जाउँ किस दरबार में???
सभापति जी धीरज दे रहे,
मानुष को वो कोस रहे |
अपनी सुविधाओं की खातिर,
जो एेसा  खिलवाड़ करे ||

परिचय-
नाम – सीता गुप्ता 
जन्मतिथि – 25-05-1957
वर्तमान पता –दुर्ग (छत्तीसगढ़) 
राज्य- छ. ग. 
शहर – दुर्ग 
कार्यक्षेत्र – सेवानिवृत वरिष्ठ शिक्षिका एन. एम. डी. सी. लिमिटेड (बी. आई. ओ. पी. सी. से. स्कूल) किरन्दुल छ. ग. 
विधा – काव्य लेखन 
मोबाइल – 08839445051
प्रकाशन – वुमन आवाज के माध्यम से “ओस की बूँद “प्रथम काव्य संग्रह प्रकाशित, बैलाडीला की सर्जना पत्रिका में रचनाएँ प्रकाशित, शालेय एवं सामाजिक पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित, लक्ष्मी पब्लिकेशन की कुछ शिक्षक कवि 2में रचना प्रकाशित, एवं लोकजंग में रचनाएँ प्रकाशित.

सम्मान – “वुमन आवाज 2018का सम्मान “बैलाडीला क्षेत्र में इंटुक यूनियन द्वारा “बेस्ट टीचर्स अवार्ड “एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष 2016 के कार्यक्रम में यूनियन एस. के. एम. एस. द्वारा विशेष सम्मान.
उपलब्धियाँ – “ओस की बूँद “प्रथम काव्य संग्रह, पर्यावरण स्लोगन प्रथम पुरस्कृत बोर्ड नाम के साथ आज भीबैलाडीला की मुख्य सड़क पर स्थापित है —“एक बूँद से सजता है सीप में मोती…..

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।