प्रतीक्षा

kiran baranval
जीवन की संध्या बेला में जब तन के साथ मन भी जर्जर होने लगता है तब तक अपनी संतति भी आजीविका के लिए मजबूर हो अपनी जड़ों से दूर जा बैठती हैं। जिन बच्चों की किलकारियों और चुहलबाजी से घर की ईंटे भी
ठहाका मारा करतीं थी आज वहां घुप्प सन्नाटा पसरा हुआ है। गहरी नीरवता को तोड़ती महरी की आवाज़ या यदा कदा पति-पत्नी के संवाद जिन्दा रहने का सबूत दे दिया करता हैं ।
बुजुर्ग दंपत्ति एक दूसरे की भावनात्मक जरूरतें पूरी करते मानो जीवन दीप के बुझने का इन्तजार कर रहे हों।
बदलते मौसम के कुप्रभाव ने बुढ़ी हड्डी को अपने चपेट में लेने में देरी नहीं की।   पति की सेवा करती जीर्ण शीर्ण काया भी अंततः मौसम की मार से स्वंय को बचा न पाई।
दो बक्त की रोटी तो काम वाली बना जाती पर बीमारी से
लड़ने का हौसला वे कहाँ से पाते जो अपने सगे ही दे सकते।
मन बहलाने के लिए बागीचे में झूला झूलते अतीत के सुखद दुखद पलों को जीते वर्तमान से कोसों दूर जा रहे थे कि कौवे की कर्कश बोली ने ध्यान भंग कर दिया।
‘अरे ओ मुँहजली क्यों शोर कर रही हो? किसके आने का बाट जोहने कहती हो ? भला सूखे वृक्ष पर किसी ने नीड़ बनाया है।” साड़ी के आँचल से वृद्धा  चूपके से बह आए
आँसू को पोंछ लिया कहीं पति ने देख लिया तो फिर सारा दिन उदासी से घिरे रहेंगे ।
मन बदलने के लिए सरसरी निगाहों से बागीचे का मुआयना करने लगी,बेतरतीब तरीके से फैले पौधे को  बारिश की बूंदो ने जिन्दा तो रखा था पर देखभाल के अभाव में चमन उजाड़ प्रतीत हो रहा था।
अचानक हाथ में रखी मोबाइल घनघना उठी। बेटे ने, उन्ही के शहर में पदस्थापन की खबर दे दूनिया की सारी खुशियाँ उनके दामन में डाल दिया।होठों पर मधुर स्मित खेल गई ,जीने का हौसला एकाएक बढ़ गया था ,उनलोगों का। दूर किसी पेड़ के सूखे डाल पर हरे हरे कोपल निकल रहे थे।कौवे के कांव कांव की आवाज मधुर संगीत सा मन को उत्साहित कर रहा था।
फड़फड़ाती लौ के बुझने से पहले ही दीप में घी डाल दिया गया।
#किरण बरनवाल 
जमशेदपुर 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।